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Chapiheda, m.p.:- शरद पूर्णिमा पर्व पर राधे कृष्ण की झांकी एवं रास।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय छापीहेड़ा के द्वारा शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया गया ।जिसमें श्री कृष्ण एवं बाल गोप- गोपीओं की झांकी सजाई गई ।झांकी का उद्घाटन ब्रह्माकुमारी मधु दीदी एवं नगर के वरिष्ठ जनों के द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने सुंदर सुंदर प्रस्तुतियां दी, रास किया ।ब्रह्माकुमारी मधु दीदी ने सभी को शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी एवं ब्रम्हाकुमारी सीमा बहन ने शरद पूर्णिमा का महत्व बताया । उन्होंने कहा कि इस दिन चंद्रमा अपने चरम सौंदर्य में होता है शीतल होता है ऐसे ही हमें भी अपने व्यवहार मधुर, शांत ,शीतल बनाना है । इस दिन विशेष खीर बनाई जाती है जिसमें दूध ,चावल और शक्कर होता है और तीनों ही सफेद है। अर्थात हमें अपने मन को उतना ही शुद्ध, सकारात्मक सद्भावना से युक्त बनाना है जिसकी खुशबू चारों ओर फैले और सबको खुशी ,प्रसन्नता प्राप्त हो । इस दिन रास करते हैं जिसका अध्यात्मिक रहस्य है कि हमें आपस में संस्कारों की रास मिलानी हैं और हमारे यह मिलनसारिता के संस्कार आने वाली नई दुनिया स्वर्ग में चलेंगे ।जिस दुनिया में सभी नर-नारी ताल से ताल, सुर से सुर मिलाकर चलेंगे। जिस दुनिया का गायन है जहां शेर और गाय भी एक घाट पर पानी पीते हैं जहां सभी 16 कला संपूर्ण संपूर्ण अधिकारी मर्यादा पुरुषोत्तम होते हैं । आज के दिन माना जाता है कि चंद्रमा से अमृत बरसता है अर्थात वर्तमान समय सृष्टि का ब्रह्म मुहूर्त चल रहा है जिसमें ज्ञान सूर्य परमात्मा ज्ञानचंद्रमा प्रजापिता ब्रह्मा के द्वारा ज्ञान अमृत वर्षा रहे हैं जो इस बेला में जागते हैं वह इस ज्ञान अमृत को प्राप्त करते हैं अपना वर्तमान और भविष्य उज्जवल बनाते हैं । अंत में सभी ने लक्ष्मी जी की आरती की और भगवान को भोग स्वीकार कराया गया।

Source: BK Global News Feed

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