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स्वयं की अस्तित्व की पहचान जरुरी :- ब्रह्माकुमारी शशि बहन आत्मा के सात गुणों की महत्ता

प्रेस विज्ञप्ति
स्वयं की अस्तित्व की पहचान जरुरी :- ब्रह्माकुमारी शशि बहन
आत्मा के सात गुणों की महत्ता
ब्रह्माकुमारीज़ बलोदा में तनाव मुक्त राजयोग अनुभूति शिविर पुनः जारी

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बलोदा :- आत्मा अजर अमर अविनाशी शास्वत सत्ता है आत्मा वो दिव्य शक्ति है, जो शरीर के समाप्त होने पर भी समाप्त नहीं होती सिर्फ अभी तक हमें समझ नहीं थी और हमें लगता था कि आत्मा बस शरीर छोड़ने के बाद का चीज है जब हम शरीर में हैं तब आत्मा क्या है वो स्पष्ट नहीं थी,तो इसलिए आत्मा शब्द को मृत्यु के साथ देखा गया की आत्मा निकल गयी है आत्मा भटक रही है जब आत्मा अपना शरीर छोड़ती है तब तो उसे क्लियर अनुभव होता है की मै एक शक्ति हूँ ये तो मेरा एक शरीर है आज मेडिकल साइंस ने भी बताया है कि कुछ क्षणों के लिए आत्मा शरीर से बहार निकल जाती है और सभी घटनाओं को साक्षी होकर देखने में सक्षम होती है फिर थोड़ी देर बाद वापस इस शरीर में आ जाती है और अनुभव करती है की मृत्यु के बहुत करीब जाकर वापस आ गयी कई बार उस व्यक्ति को मृत घोषित भी कर दिया जाता है फिर अचानक वो जिन्दा हो जाता है, हमें सारा कुछ बाहर का पता है पर मै कौन हूँ वो नहीं पता| जब आत्मा एक दूसरा नया शरीर लेती है तो पुरानी सारी यादें रहती है, लेकिन एक बच्चा बोल नहीं सकता इसलिए वो अपने पूर्व जन्मों की बातें हमें बता नहीं सकता है आप अगर एक छोटे बच्चे को बहुत ध्यान से देखें तो हमें पता चलेगा की वो कभी कभी ऐसे ही हसने लगता है,कभी ऐसे ही रोने लगता है,आत्मा को शास्त्रों में भी सतो गुणी कहा गया है इन सात गुणों की जीवन पर्यन्त आवश्यकता बनी रहती है सुख,शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता यह आत्मा के मूल गुण है जैसे शरीर को जीवन जीने के लिए पांच तत्त्व अनिवार्य है किसी एक तत्त्व की कमी से शरीर नहीं चल सकता ठीक इसी प्रकार आत्मा को जीवन जीने के लिए इन सातों गुणों की जरुरत है, परन्तु व्यक्ति के अंदर आज इन गुह णों की कमी भिन्न भिन्न रूप में देखने में आती है हर कोई मांग रहा है मुझे प्रेम चाहिए शांति चाहिए परन्तु कोई दे नहीं पा रहा है, वास्तव में इन गुणों की भरपूरता से ही हम सुख शांतिमय जीवन जी सकते है उसके लिए हमें स्वयं की पहचान के साथ उन गुणों के श्रोत से जुड़ना होगा भरपूर होना होगा तभी हमें जीवन का आनंद मिल सकता है गीता में भगवान से अर्जुन को स्वयं की पहचान दी और दिव्य नेत्र दिया और कहा हे अर्जुन तुम स्व की स्थिति में स्थित रहो तब तुम्हारा कल्याण होगा अनिभूति शिविर के प्रथम दिन में अपने शाश्वत श्वरूप का अनुभव किया और तनाव पूर्ण वातावरण में भी सुखद जीवन जीने की कला सीखी |

Source: BK Global News Feed

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