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योग कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है, मन का नाता ईश्वर से जोड़ना ही योग है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

प्रेस विज्ञप्ति

योग कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है, मन का नाता ईश्वर से जोड़ना ही योग है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

मेडिटेशन करने से होती है अनेक शक्तियों की प्राप्ति

ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में मेडिटेशन शिविर

https://youtu.be/lAc230xO7jo

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बलौदा :- हम कोई भी कार्य बिना फायदे के नहीं करते इसलिए मेडिटेशन करने से पहले इससे होने वाले लाभ के बारे में जानना जरूरी है। गीता में भगवान द्वारा सिखाए गए मेडिटेशन को राजयोग कहते हैं। राजयोग के अभ्यास अर्थात् मन का नाता ईश्वर से जोड़ने से अविनाशी सुख-शान्ति की प्राप्ति तो होती ही है, साथ कई प्रकार की आध्यात्मिक शक्तियां भी आ जाती हैं। इनमें से आठ बहुत ही मुख्य और महत्वपूर्ण हैं। देवियों को भी आठ भुजाएं बतायी जाती हैं जो अष्ट शक्तियों के ही प्रतीक हैं। कई मनुष्य योग को बहुत कठिन समझते हैं। लेकिन वास्तव में राजयोग बहुत सहज विषय है जो चलते-फिरते भी किया जा सकता है। जैसे एक बच्चे को अपने पिता की याद स्वतः और सहज रहती है ऐसे ही हम सभी आत्माओं को अपने पिता परमात्मा की याद स्वतः और सहज रहनी चाहिए। लेकिन ईश्वर का सत्य परिचय न जानने के कारण हम ईश्वर को याद ही नहीं करते इसलिए हमें शक्तियों की प्राप्ति नहीं होती। उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में चल रहे राजयोग शिविर के बेसिक कोर्स के अंतिम दिन ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। दीदी ने बताया कि इन शक्तियों में सबसे पहली शक्ति सहनशक्ति है। रिश्तों में जितना सहन करेंगे उतने ही मजबूत बनेंगे। लोगों के संस्कारों को सहन करना है। सहन करते यह भी ध्यान रखना है कि हमारी शीतलता कहीं खो न जाए, नहीं तो कई बार ऐसा होता है कि हम सहन करते-करते बॉयल फ्रॉॅग की तरह हो जाते हैं और एक समय आता है कि हम ज्वालामुखी की तरह फट पड़ते हैं। हमें ध्यान रहे व्यक्तियों का सहन करना है और परिस्थितियों का सामना करना है। 2. दूसरी शक्ति है सामना करने की। यदि मन शक्तिशाली और सकारात्मक है तो बाह्य चुनौतियों व परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति आ जाती है। 3. परखने की शक्ति- कोई भी कार्य करने से पहले उसके फायदे व नुकसान को परखना जरूरी है और बुद्धि की एकाग्रता न होने व कमजोर विवेक के कारण परखने व निर्णय लेने में समय बहुत जाता है। 4. निर्णय करने की शक्ति- अपनी जिंदगी से जुड़े निर्णय आप स्वयं लें क्योंकि आपसे बेहतर आपको कोई और नहीं जान सकता है। 5. सहयोग शक्ति- घर में एक-दूसरे को सकारात्मक व शुभ भावनाओं के साथ सपोर्ट करें, आगे बढ़ने में मदद करें। जैसे एक-एक उंगली के सहयोग से गोवर्धन पहाड़ उठ गया था तो समस्या क्या बड़ी चीज है। 6. समाने की शक्ति- परिवार में एक-दूसरे की कमी-कमजोरियों को अपने अंदर समाने की आदत डालें फिर देखिए आपका घर स्वर्ग बन जाएगा। 7. विस्तार को संकीर्ण करने की शक्ति- व्यस्त होते हुए भी मन को सदा हल्के रखना, बिज़ी लाइफ होते भी स्वयं की इज़ी रखना। 8. समेटने की शक्ति- व्यर्थ विचारों से स्वयं को समेटकर अपने मन को पॉज़िटिव थॉट दें। इन सभी अष्ट शक्तियों को प्राप्त करने के लिए मां से वरदान लें और प्रतिदिन राजयोग मेडिटेशन और सत्संग जरूर करें।

Source: BK Global News Feed

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