Uncategorized

भगवान शिव ही दुनिया के सबसे अच्छे वर – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
भगवान शिव ही दुनिया के सबसे अच्छे वर – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
कड़वाहट को मिटाकर मधुरता को अपनाने का यादगार त्यौहार है हरियाली तीज
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में शिवजी के सत्संग के लिए एकत्रित हुए साधक

#gallery-2 {
margin: auto;
}
#gallery-2 .gallery-item {
float: left;
margin-top: 10px;
text-align: center;
width: 33%;
}
#gallery-2 img {
border: 2px solid #cfcfcf;
}
#gallery-2 .gallery-caption {
margin-left: 0;
}
/* see gallery_shortcode() in wp-includes/media.php */


बिलासपुर टिकरापाराः- ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आध्यात्मिक रहस्यों के साथ तीज त्यौहार मनाया गया। इस अवसर पर सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि आज के दिन कुमारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और माताएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। किन्तु सबसे अधिक भाग्यशाली तो वे हैं जिन्होंने वर्तमान संगमयुग में स्वयं भगवान शिव को ही अपना वर मानकर उनके कार्य में सहयोगी बन सेवाएं कर रही हैं। क्योंकि भगवान शिव से अच्छा वर दुनिया में कहीं नहीं मिलेगा जो न कभी डांटते हैं, न मारते हैं बल्कि प्यार भरी शिक्षा देकर ही हमारी सारी कमियों को दूर कर देते हैं।
दीदी ने बतलाया कि भारत के लगभग हर त्यौहार में भगवान शिव की ही पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि वे सर्व आत्माओं के पिता सदाशिव भोलेनाथ हैं। हमें गर्व होना चाहिए कि सभी जिनकी पूजा करते हैं और जो सभी पतियों के पति और सभी पिताओं के पिता परमात्मा शिव हैं, हम मानव से देव बनाने के उनके श्रेष्ठ कार्य में सहयोगी बनते हैं। व्रत का मुख्य उद्देश्य होता है कि हम भगवान की याद में रहें। आज के समय में एक और व्रत करने की आवश्यकता है कि हम अपने मुख से अपशब्दों का प्रयोग न करें। इसलिए इस त्यौहार की शुरूआत तो करेला खाकर की जाती है लेकिन व्रत तोड़ा जाता है मीठा खाकर अर्थात् जीवन में मधुरता को अपनाकर।

मिलन का अवसर होता है यह पर्व – ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन

ब्रह्माकुमारी गायत्री बहन ने कहा कि माताओं-बहनों के लिए यह बहुत खुशी का पर्व है क्योंकि इस पर्व में ही पियर घर जाने का अवसर मिलता है और एकसाथ सभी से मिलन होता है। विशेषकर हमारे छत्तीसगढ़ में यह उत्सव बहुत उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। कथा आती है कि सौ वर्ष की तपस्या के बाद पार्वती को शिवजी प्राप्त हुए। जब हम श्रद्धा भाव से भक्ति करते हैं तब ही भक्ति से शक्ति मिलती है। ज्ञान मुरली में हम सुनते हैं कि भगवान शिव पारस के समान हैं और हम सभी आत्माएं पार्वतियों के समान हैं जब हम भगवान शिव के सानिध्य में आते हैं तो पत्थर से पारस बन जाते हैं। कड़वाहट को मिठास में बदलने के लिए ज्ञान की आवश्यकता होती है जो प्रतिदिन के सत्संग से हमें मिलती है।
इस अवसर पर सभी ने मिलकर भगवान शिव को याद किया और तीजा के निमित्त अपने प्यारे प्रियतम परमात्मा शिव को भोग भी लगाया गया। आज के सत्संग में त्याग, तपस्या और सेवा से ताज, तख्त और तिलक की प्राप्ति को लेकर अव्यक्त मुरली सुनाई गई।

Source: BK Global News Feed

Comment here