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ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
श्रीकृष्ण की तरह जीवन की कड़वी बातों को करें डिलीट – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सत्संग, ध्यान व सकारात्मक चिंतन अच्छे माध्यम हैं बातों को भूलने के लिए

कृष्ण-राम का नाम लेने वाले मुख से अपषब्दों का प्रयोग न करें…

सृष्टि को कलियुग बनाने में हमारा ही योगदान है इसलिए सतयुग भी हमें ही बनाना होगा।

कृष्ण की झांकी देखने के साथ अपने भीतर भी झांकें

ब्रह्माकुमारीज़ बलौदा में जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया

श्रीकृष्ण के चरित्रों पर आधारित संगीतमय ध्यान का अभ्यास कराया गया।

कृष्ण राधे के रूप में सजे हुए बच्चों को सेब व मक्खन का भोग लगाया गया और ईश्वरीय सौगात दी गई।

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बलौदा, 31 अगस्त :- श्रीकृष्ण की मुस्कुराहट हम सभी के जीवन के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। क्योंकि ऐसा नहीं है कि श्रीकृष्ण के जीवन में कोई परिस्थितियां नहीं थी। बल्कि उन्हें तो बचपन से ही अनेक मुसीबतों का सामना करना पड़ा। फिर भी उन्होंने अपनी मुस्कुराहट कभी नहीं छोड़ी और जीवन की सभी कड़वी बातों को डिलीट किया। बातों को पकड़े रहने से मन कमजोर हो जाता है और हम उदासी, दुख, अशांति, अवसाद, तनाव जैसे मानसिक रोग से ग्रसित हो जाते हैं जिसे मन का पैरालिसिस कह सकते हैं। खुशी, शांति व सुख की प्राप्ति के लिए बातों को भूलना होगा और भूलने का तरीका है – सत्संग, ध्यान व सकारात्मक चिंतन। इसके साथ ही कर्म की गति का ज्ञान भी हमारे मन को सशक्त बनाता है।
उक्त बातें बलौदा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ शिव-दर्शन भवन में आयोजित जन्माष्टमी उत्सव में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी से अनुरोध करते हुए कहा कि जिस मुख से श्रीकृष्ण व श्रीराम का नाम लेते हैं उस मुख से अपशब्दों का प्रयोग न करने का आज संकल्प करें साथ ही उस मुख में शराब, सिगरेट, गुटखे जैसी गंदी व हानिकारक चीजें न डालें।
बच्चों को संस्कारवान बनाने में माता-पिता व शिक्षक की भूमिका अहम….
आपने सभी अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के बच्चों के संस्कार जो बिगड़ रहे हैं काफी हद तक उसके जिम्मेवार मात-पिता हैं क्योंकि बच्चों में श्रेष्ठ संस्कार डालने का समय गर्भ से ही शुरू हो जाता है। और यदि हमने बच्चों को बचपन से टीवी, मोबाइल आदि इलेक्ट्रॉनिक्स चीजों से दूर नहीं रखा तो संस्कारित कैसे करेंगे। इसके लिए हमें भी मोबाइल आदि का प्रयोग कम से कम करना होगा। और स्वयं के सभी कर्मों पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि बच्चे सबसे ज्यादा अपने मात-पिता को फॉलो करते हैं।
साथ ही दीदी ने सभी से यह भी अनुरोध किया कि बच्चों के अंदर कॉम्पीटिशन की भावना न डालें बल्कि आगे बढ़ने व बढ़ाने का भाव जागृत करते हुए एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दें। उन्हें पढ़ाई के लिए इतना अधिक दबाव न दें कि वह अंदर से भयभीत हो जाए। यदि कुछ अंक कम भी आ जाएं तो आगे के लिए उनका मार्गदर्शन करें।
इससे पूर्व दीदी ने सभी को श्रीकृष्ण के जीवन चरित्रों के आधार पर संगीतमय ध्यान का अभ्यास कराया। जन्माष्टमी उत्सव में श्रीकृष्ण-राधे के रूप में सजे हुए बच्चों की सुंदर झांकी सजायी गई। केवल झांकी न देख अपने अंदर भी झांकने की प्रेरणा देते हुए दीदी ने कहा कि तनावमुक्ति व राजयोग अनुभूति शिविर में शामिल होकर सभी अपने जीवन को खुशनुमा बनाएं। सभी ब्रह्माकुमारी बहनों ने बच्चों को मक्खन व सेब का भोग खिलाया और तत्पश्चात् सभी को प्रसाद वितरित किया। सभी बच्चों को सेवाकेन्द्र की ओर से ईश्वरीय सौगात दी गई। अंत में सभी बहनों-माताओं ने श्रीकृष्ण के गीतों पर रास किया।

Source: BK Global News Feed

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