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भगवान हैं सुप्रीम चिकित्सक जो श्रेष्ठ कर्म व दुआओं से ही करते हैं सभी को स्वस्थ

ंसादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
त्याग, सेवा व बलिदान की प्रतिमूर्ति हैं चिकित्सक – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
डॉक्टर की मुस्कान से बढ़ जाता है पेशेन्ट का मनोबल
भगवान हैं सुप्रीम चिकित्सक जो श्रेष्ठ कर्म व दुआओं से ही करते हैं सभी को स्वस्थ… आत्माओं को पांच विकारों की बीमारी से मुक्त कर बनाते हैं पवित्र
राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस पर सभी चिकित्सकों को दी शुभकामनाएं

 

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देवांगन मोहल्ला, बलौदाः- पेशेन्ट को संभालने के लिए बहुत पेशेन्स की आवश्यकता होती है। उनकी सेवा करने वाले डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ के अंदर बहुत धैर्य होता है। जो व्यक्ति किसी पर विश्वास नहीं करता वह डॉक्टर के कहने पर दवाओं को मन से स्वीकार कर विश्वास के साथ खाकर ठीक हो जाता है। भगवान के बाद का स्थान एक चिकित्सक का माना जाता है क्योंकि वे हमारे जीवन की रक्षा करने में अहम भूमिका अदा करते हैं।
ये बातें राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर देवांगन मोहल्ला, बलौदा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ पाठशाला में ऑनलाइन क्लास में शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ बिलासपुर टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही।
ईश्वर हैं परमचिकित्सक….
दीदी ने कहा जब दवा काम नहीं करती तब चिकित्सक कहते हैं कि दुआ करो क्योंकि सुप्रीम चिकित्सक परमात्मा दुआओं से हमें ठीक कर देते हैं। दुआ का खाता जमा करने का साधन हैं श्रेष्ठ कर्म। हम धन कमाने पर जोर देते हैं लेकिन दुआ कमाने पर नहीं इसलिए ऐसी कमाई करें जिसमें धन के साथ दुआएं भी मिले। सूक्ष्मता में जाएं तो ईश्वर सुप्रीम सर्जन भी हैं जो वर्तमान समय हम आत्माओं को पांच विकारों की बीमारी से छुड़ाकर पवित्र बनाते हैं। जैसे किसी अच्छे डॉक्टर की पहचान तब होती है जब हम उनसे इलाज कराकर ठीक होते हैं। उसी प्रकार परमात्मा का अनुभव करने के लिए हमें उनके सानिध्य में जाना होगा अर्थात् सत्संग व ध्यान में कुछ समय देना होगा तब ही हम उनसे खुशी, शांन्त, आनन्द आदि सर्व प्राप्तियों का अनुभव कर सकेंगे।
चिकित्सक तन के साथ मन को भी मजबूत बनाएं यह समय की मांग है…
दीदी जी ने सभी चिकित्सकों से अनुरोध किया है कि वे रोगी के तन के साथ मन को भी मजबूत बनाएं क्योंकि आज व्यक्ति शारीरिक से ज्यादा मानसिक रोग से पीड़ित है। भय, चिंता, तनाव आदि मन की कमजोरियों से आत्मा की शक्ति क्षीण हो गई है अतः आज चिकित्सकों को डबल डॉक्टर की भूमिका अदा करने की जरूरत है।
डॉक्टर की मुस्कान व व्यवहार से ही बढ़ जाता है पेशेन्ट का मनोबल ….
चिन्तित पेशेन्ट को पेशेन्स देने का कार्य एक डॉक्टर से बढ़कर कोई नहीं कर सकता। उनके मुस्कुराहट व मनोबल बढ़ाने वाले व्यवहार से ही पेशेन्ट की आधी बीमारी खत्म हो जाती है। कई बार मरीज के संबंधी बार-बार प्रश्न पूछते, चिंतित होते इसमें डॉक्टर को बहुत धैर्य के साथ जवाब देकर सबको संतुष्ट करना पड़ता है।
स्वयं की बैट्री चार्ज करने अर्थात् अपनी आत्मा को शक्तिशाली बनाने के लिए दीदी ने कहा कि सभी डॉक्टर्स को अपना ख्याल रखना चाहिए और ख्याल रखते भी हैं लेकिन कई बार व्यस्तता अधिक होने के कारण अपना ख्याल नहीं रख पाते। इसलिए सभी को मेडिटेशन व पॉजिटिव थिंकिंग क्लास के लिए कुछ समय अवश्य निकालना चाहिए।
दीदी ने जानकारी दी कि कोरोना काल के पश्चात् पुनः बलौदा में क्लासेस शुरू कर दी गई हैं।

Source: BK Global News Feed

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