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पवित्रता, गंभीरता, वात्सल्य, ममता की मूर्ति और गुणों की खान थीं मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
पवित्रता, गंभीरता, वात्सल्य, ममता की मूर्ति और गुणों की खान थीं मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की 56वीं पुण्यतिथि मनाई गई
सभी बहनों व साधकों ने मातेश्वरी जी को अपनी प्रेमांजलि अर्पित की।
 
क्लास लिंक- https://youtu.be/Ud2Rp5zLkiY

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बिलासपुर टिकरापाराः- ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आज संस्था की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की 56वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर मातेश्वरी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि मातेश्वरी जी को सभी ब्रह्मावत्स प्यार से मम्मा कहते हैं। मम्मा का बड़ों के प्रति हांजी का पाठ पक्का था, वे रेग्युलर व पंक्चुअल थी। परमात्म श्रीमत पर बिना किसी संशय या किसी प्रश्न के एक्यूरेट चलती थीं जरा भी संशय नहीं रहता। इससे हर सेवा में सफलता मिलती। मम्मा अहंकार व मैंपन से मुक्त थीं वे किसी भी सफलता, विशेषता व गुणों को प्रभु प्रसाद मानती थीं।
मम्मा के अन्य गुणों का वर्णन करते हुए दीदी ने कहा कि मम्मा मर्यादाओं में सदा एक्यूरेट रहीं, देह-अभिमान को समाप्त करने के लिए रूहानियत, स्वमान और ईश्वर से सर्व संबंधों का स्नेह जैसी विशेषताओं को उन्होंने धारण किया। उनकी वाणी में नम्रता, मधुरता व सच्चाई झलकती थी। उनका चित बिलकुल साफ था। कोई भी बात दिल में ऐसे समा लेती थीं जैसे वह बात हुई ही नहीं। स्नेह की शक्ति से दूसरों को परिवर्तित कर देना- ये बहुत बड़ी विशेषता रही। उनकी संकल्प शक्ति पॉवरफूल होने से उनकी वाणी भी बहुत प्रभावशाली थी। उनके चेहरे पर दिव्यता व सत्यता की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। उनके सामने आते ही उनकी पवित्रता की दृष्टि से कोई भी क्रोध करने वाली आत्मा शीतल हो जाती है।
मम्मा सदा अथक रहती। ब्रह्ममुहूर्त से पूर्व 2 बजे से उठकर तपस्या में मग्न रहती थीं। सबकी मातृवत पालना करते हुए भी थकती नहीं थी। सबके प्रति इतनी शुभभावना थी कि उनके अवगुणों को जानते भी उनके प्रति नफरत या घृणा न रखते हुए सदा कल्याण की ही भावना रहती थी। उनके पुरूषार्थ का मुख्य बिन्दु यही था कि एक बार की हुई गलती कभी दोहराती नहीं थी। शान्त स्वधर्म में रहते हुए वे दो स्लोगन सदा याद रखती थीं कि हर घड़ी अंतिम घड़ी और हुकुमी हुकूम चला रहा हम निमित्त बन कर रहे हैं।
इससे पूर्व आज प्रातः काल से ही बाबा की कुटिया व ज्ञानगंगा हॉल में योग साधना कार्यक्रम चलता रहा। महावाक्य श्रवण के पश्चात् मातेश्वरी जी के निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया। तत्पश्चात् सभी ने परमात्मा की याद में भोग ग्रहण किया। सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखने के लिए प्रातः 6 से 8, 10.30 से 12 व शाम 6.30 से 8.30 बजे तक तीन पालियों में कार्यक्रम रखा गया।
दीदी ने जानकारी दी कि शांति अनुभूति, तनावमुक्ति, मन को एकाग्र करने, निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन सीखने के लिए उत्सुक भाई-बहनें दीदीयों से समय लेकर सेवाकेन्द्र आ सकते हैं ताकि भीड़ एकत्रित न हो।

Source: BK Global News Feed

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