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योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

प्रेस विज्ञप्ति 
योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए तन व मन दोनों का स्वस्थ होना जरूरी
टिकरापारा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व तैयारियां शुरू
प्रतिदिन प्रातः 6 से 7 ऑनलाइन योगाभ्यास आज आठवां दिन…

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बिलासपुर टिकरापाराः- 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए सभी जागरूक हों- यह बहुत जरूरी है। लेकिन पूरा जीवन स्वस्थ रखने के लिए योग की जागरूकता के साथ नियमितता भी जरूरी है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए टिकरापारा सेवाकेन्द्र में 01 जून से ही प्रतिदिन प्रातः 6 से 7 बजे नए साधकों के अनुसार योगाभ्यास आरंभ कर दिया गया है। जिसमें सभी अभ्यासों को धीरे-धीरे विधिपूर्वक सिखाया जा रहा है। साथ ही अलग-अलग आसनों के लाभ व सावधानियां भी बताई जा रही है। इसके लिए छ.ग. योग आयोग की पूर्व सदस्या ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी एवं मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा योगाभ्यास कराया जा रहा है।
शरीर व मन दोनों का स्वस्थ रहना जरूरी…
दीदी ने कहा कि जीवन का आनंद लेने के लिए तन के साथ मन का सशक्तिकरण भी जरूरी है। योग व सकारात्मक चिंतन से मन मजबूत होता है और आसन-प्राणायाम से तन की स्थिति श्रेष्ठ होती है और चारों का मिला-जुला रूप हमें श्रेष्ठता और सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है और स्वस्थ मन व शरीर से ही हम बेहतर समाज की स्थापना में योगदान दे सकते हैं।
दिल की भावना और सेवा समझ करें हर कार्यः-
नाम-मान और शान की इच्छा रख कोई कार्य करने से उसका पुण्य जमा नहीं होता। हमें जो भी कार्य मिले, उसे दिल से करें और सेवा समझ कर करें। कोई सोचे कि मुझे सरलता से हर चीज हासिल हो जाए और कई बार हासिल हो भी जाता है लेकिन जीवन में उसका प्रयोग नहीं होता तो ऐसी प्राप्ति व्यर्थ है। कोई बड़ा ऐसे ही नहीं बनता, बड़ा बनना अर्थात् झुकना, नरमदिल होना, सरल बनना। कोई अगर अहं में जीता है तो उसका स्थान कभी नहीं बन पाता।
सही विधि से योगाभ्यास में मिलती है सफलता…
सही विधि से किए गए कार्य से ही सफलता मिलती है। प्राणायाम का अभ्यास भी सही तरीके से सीखकर जब हम करेंगे तब ही हमें लाभ प्राप्त होगा। प्रातःकाल हवादार कमरे में खाली पेट योग अभ्यास करना चाहिए। केवल भस्रिका, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी व उद्गीथ प्राणायाम व वज्रासन का अभ्यास भोजन के बाद किया जा सकता है बाकी आसन-प्राणायामों के लिए भोजन के बाद 4 से 5 घण्टे का समयांतराल होना चाहिए। ध्यानमुद्रा में बैठकर प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है और रीढ़ सीधी रखने से हमारे फेफड़े फैलते हैं जिससे सांस लेने में आसानी होती है और हम ज्यादा ऑक्सीजन ले पाते हैं। यह शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा प्रभाव डालता है। यदि आप सीटिंग जॉब में हैं या पढ़ाई करते हैं तो सीधे बैठकर कार्य करने या पढ़ने से नींद भी कम आती है और हमारा व्यक्तित्व भी अच्छा दिखता है। इसके विपरीत गलत तरीके से बैठने पर पीठ दर्द की समस्या भी आ सकती है।
धीरे-2 बढ़ाएं अभ्यास, सावधानियों का रखें ध्यान, भ्रमित न हों…
किसी भी आसन या प्राणायाम का अभ्यास करते समय ध्यान रहे कि शुरूआत में जल्दी-जल्दी, ज्यादा आवृति में या सहन क्षमता से अधिक स्ट्रेच न करें अन्यथा मांसपेशियों में खींचाव आने से दर्द आरंभ हो जाएगा। जब आप नियमित अभ्यास करते जाएंगे तो धीरे-धीरे आपकी मांसपेशियों में लचीलापन आ जाएगा और आप सही स्थिति तक पहुंच जायेंगे। इस बात में भ्रमित न हों कि कहीं पर वही योग एक तरीके से सिखाया जाता तो कहीं दूसरी विधि से। ऐसा इसलिए है कि हमारे योग गुरूओं ने ही एक आसन या प्राणायाम की दो-तीन अलग-अलग विधियां सिखाई हैं जो कि उनके अनुसार सही ही हैं। साथ ही कुछ अभ्यासों में विशेष सावधानियां होती हैं जैसे हृदयरोग, हर्निया, कमर दर्द आदि के लिए कुछ सावधानियां होती हैं। जिनका उन्हें पूर्णतः पालन करना ही चाहिए।

Source: BK Global News Feed

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