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पतंजलि द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण शिविर के चार सत्रों को ब्र.कु. मंजू दीदी ने किया संबोधित

सादर-प्रकाशनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
भावनारहित मनुष्य को शान्ति व सुख नहीं मिल सकता।- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
पतंजलि द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण शिविर के चार सत्रों को दीदी ने किया संबोधित

चार सत्रों में योग के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देने के साथ योग की गहन अनुभूति कराई।

 

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‘‘भक्ति का अर्थ है भावना। जिसके मन और इन्द्रिय वष में नहीं हैं तथा इन्द्रियों के भोगों में जिनकी आसक्ति होती है उनमें भावना नहीं होती और भाव रहित मनुष्य की बुद्धि का स्थिर रहना तो दूर, वह परमात्म स्वरूप का चिंतन भी नहीं कर सकता। परमात्म चिंतन न होने से मनुष्य का मन राग, द्वेष, काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या आदि से व्याकुल रहता है अतः शान्ति नहीं मिलती। जिससे सच्चे सुख की प्राप्ति भी नहीं होती है।
उक्त बातें पतंजलि योग समिति द्वारा आयोजित 28 दिवसीय राज्य स्तरीय सह योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में ‘स्थितप्रज्ञ (स्थिरबुद्धि), नवधाभक्ति, भक्त के प्रकार व भक्तियोग विषय को गूगल मीट व फेसबुक लाइव के माध्यम से जुड़े साधकों को ऑनलाइन संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी जी ने कही।
ज्ञानयुक्त भक्ति ही श्रेष्ठ भक्ति…
आपने भक्त के चार प्रकार बताते हुए कहा कि शारीरिक कष्ट आने पर दुख दूर करने के लिए भगवान को याद करने वाले भक्त आर्त भक्त, भगवान को जानने की इच्छा रखने वाले जिज्ञासु भक्त, भोग, ऐश्वर्य और सुख प्राप्ति के लिए भगवान का भजन करने वाला अर्थार्थी भक्त और जो सदैव निष्काम होता है और भगवान को छोड़कर कुछ नहीं चाहता, वह ज्ञानी भक्त है। इन सभी में भगवान को ज्ञानी भक्त सबसे अधिक प्रिय हैं क्योंकि वह ज्ञान के साथ भक्ति करता है। इसलिए भगवान ने ज्ञानी को अपनी आत्मा कहा है। श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरणसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य सख्य और आत्मनिवेदन ये सभी शास्त्रों में वर्णित नवधा भक्ति के प्रकार हैं।
स्थिरबुद्धि के लिए कामनाओं व क्रोध पर नियंत्रण जरूरी…
मनुष्य की कामनाओं में विघ्न पड़ने से क्रोध की उत्पत्ति होती है और क्रोध से स्मृति, ज्ञान व बुद्धि का नाश हो जाता है जिससे व्यवहार में कटुता, कठोरता, कायरता, हिंसा, दीनता, मूढ़ता, जड़ता आदि दोष आ जाते हैं जो मनुष्य का पतन कर देते हैं। इसलिए कामना, क्रोध व अहंकार योगियों के महान शत्रु हैं इन्हें नियंत्रण किए बिना स्थिरबुद्धि नहीं बन सकते।
इस सत्र के अतिरिक्त दीदी ने प्राणायाम-आसन का प्रायोगिक सत्र भी लिया और आगे 27 अक्टूबर के प्रातःकालीन सत्र में योग-आसन के साथ विशेष रूप से योगनिद्रा का भी अभ्यास करायेंगी। उक्त कार्यक्रम के आयोजक के रूप में मुख्य रूप से छ.ग. योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं पतंजलि के मध्य भारत एवं नेपाल प्रभारी भ्राता संजय अग्रवाल जी एवं भारत स्वाभिमान न्यास, छ.ग. राज्य के प्रांतीय प्रभारी भ्राता देवीलाल पटेल जी भी शामिल रहे।

भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

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