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On Teachers Day:- “TEACHERS HARBINGERS OF CHANGE”

5th Sep. 2020_”Internation Teachers Day”

 

नवसारी के प्रख्यात “अग्रवाल एजुकेशन फाउंडेशन” तथा “एस.एस. अग्रवाल ग्रुप्स ऑफ़ कॉलेज” में ट्रस्टी भ्राता मुकेश अग्रवाल एवं प्रिंसिपल श्रीमती वैशाली पारेख (कोआर्डिनेटर) के द्वारा विशेष INTERNATIONAL TEACHERS DAY के उपलक्ष में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया| जिसमे मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.बी.के. सुनीता बहन (मा. आबू) को निमंत्रण दिया गया तथा राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी (नवसारी सेवाकेंद्र संचालिका) द्वारा सभी शिक्षकों के लिए आशीर्वचन रखे गए|

यह वेबिनर ज़ूम द्वारा तथा यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारित किया गया| जिसमे कार्यक्रम के अंत में सवाल-जवाब के सेशन में कईयों ने सवाल भी पूछे|

डॉ.बी.के. सुनीता बहन (मा. आबू) ने कहा कि – माता पिता बच्चे को जन्म देते है और टीचर उनको सिखाते है कि कैसे उनको स्टैंड होना है, उनका स्टेटस कैसे बने|

* एडिस लेटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है – बाहर निकलना| इसलिए एजुकेशन देने वाला अर्थात् विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं, योग्यताओं, विशेषताओं को बाहर निकलने (जागृत करने) वाला|

* उन्होंने कहा – वर्तमान परिवेश में बच्चों को परा और अपरा दोनों प्रकार की नॉलेज की जरुरत है इसलिए शिक्षक पहले इसका स्वरुप बने| कहा भी जाता है- Knowledge share-Knowledge square अर्थात् यह दायरा बढ़ता जायेगा|

* बच्चों को, फ्यूचर जनरेशन को यह भी सिखाया जाये कि – किसी भी प्रकार की समस्या आये तो वे कैसे उसका सामना करें? इसके लिए स्वयं को राजयोग मैडिटेशन से सशक्त बनाया जाये|

* टीचर प्रतिज्ञा करें अपने से – सिर्फ इम्प्रेस नहीं करें अपने करिश्मा स्टाइल से बल्कि इम्प्रेस और इन्स्पायेर  करें अपने टाचिंग्स के साथ साथ अपने करेक्टर से, अपने प्योर और पॉजिटिव वाइब्रेशन से

* टीचर अपने अंदर के जेनुअन पर्सन को जेनुअन वाइब्रेशन देना है | सिर्फ बहार की पर्सनालिटी नहीं बल्कि आंतरिक पर्सनालिटी को जागृत करें |

* टीचर्स ये ध्यान में रखकर टीच करें कि हमें सिर्फ इनफार्मेशन नही देना है बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन करना है| अपने कमजोरियों को ख़त्म करना है, अपनी स्ट्रेंथ को बढ़ाना है| अगर खुद के लिए हमने किया होगा तो हम अपने विद्यार्थियों से भी करवा पाएंगे|

* इसके लिए चेक करें हमारा स्वयं के साथ इनर टॉक कैसा है? अगर नेगेटिव होगा तो हमारे से वह नकारात्मक वाइब्रेशन ही आटोमेटिक फैलेंगे और हमारा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो जायेगा| अत: हमारा स्वयं से सकरात्मक इनर टॉक हो ये ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा जरुरी है|

टीचर्स बच्चों धैर्यतापुर्वक को सुने, उन्हें समझने की कोशिश करें फिर प्यार से उनकी समस्या का समाधान दे बजाय अधिक अपेक्षा रखे और अपनी बात थोपने के|

टीचर्स स्टूडेंट्स की स्ट्रेंथ का चिंतन करें क्योंकि हमारा ये सकरात्मक चिंतन चमत्कारिक परिणाम दिलाने वाला है| words के energy level से पहले  thoughts  के energy vibration पहुँच जाते हैं| अत: अपने विचार और दृष्टिकोण पॉजिटिव रखें|

उन्होंने कहा कि टीचर्स सकरात्मक के साथ हैप्पी मूड में हमेशा रहे, हैप्पीनेस हमारे अंदर है, जब इस ATTITUDE से आगे बढ़ेंगे तो वही ख़ुशी के वाइब्रेशन REDIATE  होंगे हमारे से|

अंत में बी.के. सुनीता बहन ने सभी को मास मेडिटेशन भी कराया|

इसके बाद  राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी ने  सभी को आशीर्वचन के रूप में कहा कि- मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में शिक्षा और शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान है| मूल्यनिष्ठ शिक्षा समाज को पतन से बचाने वाली है| शिक्षक को गुरु का स्थान दिया गया है, इसलिए माता पिता से भी ज्यादा ऊँचा स्तर शिक्षक आँका गया है|

शिक्षक का न केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण बल्कि श्रेष्ठ समाज के लिए कर्णधार बच्चों के अंदर गुण और सुसंस्कारिता का निर्माण करने में भी बहुत बड़ा योगदान है | क्योंकि किताबों में पदाई जाने वाली बातों से ज्यादा पढ़ाने वाले के व्यव्हार का प्रभाव पड़ता है|

भारत अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धति के कारण ही विश्व गुरु कहलाया| परन्तु आज पाश्चात्य संस्कृति का प्राचीन संस्कृति पर दुष्प्रभाव आ गया है| इसे हटाने के लिए सबकी नज़र सिर्फ शिक्षक पर ही है|समाज के लिए मूल्य विहीनता एक बहुत बड़ी चुनौती है इस समस्या को दूर करने के लिए नैतिक शिक्षा के द्वारा आदर्श युवाओं का निर्माण कर सकता है | हमारी संस्कृति में “आचार्य देवो भव” कहा गया है| अपने आचरण से जो विद्यार्थियों को श्रेष्टता की और ले जाये वही श्रेष्ट शिक्षक है|

अंत में प्रिंसिपल श्रीमती वैशाली पारेख ने सबका आभार व्यक्त किया|

300 लोगों ने इस ऑनलाइन वेबिनार में लाभ लिया|

Source: BK Global News Feed

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