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याददाश्त बढ़ाने के लिए सुबह मेडिटेशन करें … ब्रह्माकुमारी गंगा दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

याददाश्त बढ़ाने के लिए सुबह मेडिटेशन करें … ब्रह्माकुमारी गंगा दीदी

रायपुर, 28 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी गंगा दीदी ने कहा कि याददाश्त को बढ़ाने के लिए मेडिटेशन सीखें। सुबह उठकर परमात्मा के साथ मन के तार जोड़कर एकाग्रता को बढ़ाना होगा। किसी चीज को याद करने के लिए बुद्घि में उसका चित्र बनाएं। मन और बुद्घि के एकसाथ मिलकर काम करने से एकाग्रता आती है।

ब्रह्माकुमारी गंगा दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था- स्मरण शक्ति का विकास। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि सारे दिन की दिनचर्या में अनेक छोटी-छोटी बातों को हम भूल जाते हैं। जो हमको याद रहनी चाहिए वह भी भूल जाते हैं। भूलने का प्रमुख कारण है एकाग्रता की कमी और तनाव। एक बच्चा सारे दिन में तीन सौ से अधिक बार मुस्कुराता है। लेकिन जैसे जैसे उसकी उम्र बढ़ती जाती है। वह मुस्कुराना भूलने लगता है। उसकी खुशी गुम हो जाती है और उसकी याददाश्त भी कम होने लगती है।

ब्रह्माकुमारी गंगा दीदी ने कहा कि कार्य व्यवहार में तनाव होने से खुशी कम हो जाती है। प्राय: देखा गया है कि घर में माता-पिता में सबसे ज्यादा तनाव बच्चों की परीक्षा के समय मार्च और अप्रैल माह के दौरान होता है। तनाव का हमारी याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हम व्यायाम करते हैं। खान-पान का ध्यान रखते हैं किन्तु मन को स्वस्थ रखने के लिए हम कुछ नहीं करते हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे मोबाईल अथवा कम्प्यूटर में डाटा स्टोर करते जाते हैं। किन्तु धीरे-धीरे जब हार्डडिस्क भर जाता है तो कम्प्यूटर धीमा चलने लगता है। तब हमें डाटा को डिलीट करना पड़ता है। उसी तरह बचपन से ही हम बहुत सारी सूचनाएं दिमाग में भरते जाते हैं। किन्तु हमें उसे डिलीट करना नहीं आता है। हमें अपनी याददाश्त को बढ़ाने के लिए दिमाग से नकारात्मक बातों और विचारों को डिलीट करना सीखना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि कोई भी घटना को हम देखते सुनते या पढ़ते हैं वह मन और बुद्घि में सुरक्षित स्टोर हो जाता है। मन किसी भी चीज को सोचने का कार्य करता है। बुद्घि उसका चित्र बनाता है। मन और बुद्घि जब मिलकर काम करते हैं तो उसको एकाग्रता कहते हैं। यह एकाग्रता किसी भी कार्य में सफलता का आधार है। जब हम मन और बुद्घि को एक ही काम पर केन्द्रित करतें हैं तो वह एकाग्रता कहलाता है। किसी चीज को याद रखने के लिए बुद्घि में उसका चित्र बनाएं। चित्र संगीत और रंग इन तीनों की सहायता से याद रखना सहज हो जाता है।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254


सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

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