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प्रतिस्पर्धा और बेलगाम इच्छाएं चिन्ता पैदा कर रही हैं … ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

प्रतिस्पर्धा और बेलगाम इच्छाएं चिन्ता पैदा कर रही हैं … ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

रायपुर, 29 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि आजकल बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा और बेलगाम इच्छाएं चिन्ता का कारण बनी हुई हैं। लोग अपनी प्राप्ति से खुश नहीं होते बल्कि पड़ोसी को कम मिलने पर खुशी का अनुभव करते हैं।

ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था- चिन्ता रहित कार्यशैली। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया में लोग चिन्ताओं से घिरे हुए हैं। किसी को धन कमाने की तो किसी को धन बचाने की चिन्ता है। किसी को कल तो किसी को आज की चिन्ता है। किसी को बच्चे की चिन्ता है तो कोई माता-पिता को लेकर चिन्तित हैं। वर्तमान युग को यदि चिन्ता का युग कहें तो गलत नहीं होगा। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्गों तक सभी चिन्तित हैं।

ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने कहा कि कुछ लोग बिना किसी कारण के चिन्तित रहते हैं। चिन्तित रहने की उनकी आदत बन जाती है। चिन्ता के प्रमुख तीन कारण पाए गए हैं। पहला और सबसे बड़ा कारण है प्रतिस्पर्धा। हम अपनी तुलना पड़ोसी से करने लग जाते हैं। लोग इसलिए चिन्तित नहीं होते हैं कि उन्हें कम मिला है बल्कि इसलिए ज्यादा चिन्तित रहते हैं कि पड़ोसी को ज्यादा क्यों मिला? प्रतिस्पर्धा की दौड़ मे मनुष्य को पता ही नहीं चलता कि कब उसके अन्दर ईष्या ने घर कर लिया है।

उन्होंने बतलाया कि बेलगाम इच्छाएं चिन्ता का दूसरा कारण होती हैं। मनुष्य की इच्छाएं अनन्त होती हैं। इनको पूरा कर पाना भी असम्भव है। कहा जाता है कि इच्छाएं एक बेलगाम घोड़े के समान है जिस पर सवार होकर व्यक्ति सुख और शान्ति रूपी मंजिल तक पहुंचना चाहता है। इच्छा हमें कभी अच्छा नहीं बनने देगी। चिन्ता और भय में रहने वाले व्यक्ति की निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है। उससे किसी भी कार्य को अच्छे और सुचारू ढंग से करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि चिन्ता से मुक्त होकर ही सुखद जीवन जी सकते हैं। चिन्ता के साथ जीवन में सुख और शान्ति का अनुभव नहीं कर सकते हैं। जब हम किसी चीज को अपना समझते हैं तब उसके प्रति मोह पैदा हो जाता है। अगर हम ट्रस्टी होकर कार्य करेंगे तो मोह खत्म हो सकता है।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254


सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

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