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भौतिकता के बीच रहते हुए बुद्घि का योग परमात्मा के संग जुड़ा हो… ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

भौतिकता के बीच रहते हुए बुद्घि का योग परमात्मा के संग जुड़ा हो… ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी

रायपुर, 26 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने कहा कि आज भौतिकता की रेस लगी हुई है। लोग अध्यात्म से दूर होते जा रहे हैं। भौतिक साधनों के बीच रहते हुए अगर हमने अपना बुद्घियोग परमात्मा के साथ नहीं लगाया तो जीवन में उतार चढ़ाव आते रहेंगे। सुख और शान्ति से वंचित रह जाएंगे।

ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था- समय की पुकार। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने आगे कहा कि समय के लिए बहुत सारी उक्तियाँप्रसिद्घ है। कहा जाता है कि समय बड़ा बलवान है। समय के आगे किसी की नहीं चलती। जो समय के साथ अपने में परिवर्तन कर लेता है वह समय के साथ आगे बढ़ जाता है। लेकिन समय जिस बदलाव की मांग करता है यदि उसके अनुसार हमने अपने आपको नहीं बदला तो वही समय हमें पीछे ढकेल देता है। इसीलिए समय को सबसे बड़ा शिक्षक कहा जाता है।

उन्होंने कहा कि समय की मांग क्या है? यह चिन्तन का विषय है। समय हमें बतला रहा है कि आगामी भविष्य में समाज के आगे सच्चरित्रता का संकट आने वाला है। अध्यात्म के अभाव में सबसे पहली आपदा आएगी दिव्य गुणों का सूखापन। ईमानदारी सत्यता इन सबकी कमी तो आज भी है। अगर हमने समय रहते परिवर्तन नहीं किया तो सत्यता ईमानदारी सच्चाई आदि दिव्य गुणों का सूखा पडऩे वाला है। इन गुणों का अकाल हो जाने से लोग डर और असुरक्षा की भावना के साथ जीने के लिए विवश हो जाएंगे।

ब्रह्माकुमारी दीक्षा दीदी ने कहा कि दूसरी आपदा व्यर्थ और नकारात्मक विचारों के रूप में आएगी। आज समय और परिस्थिति बदलती जा रही है। एक घटना ने दुनिया भर में लोगों को व्यर्थ सोंचने के लिए मजबूर कर दिया है। व्यर्थ और निगेटिविटी इतनी बढ़ जाएगी कि यह व्यक्ति को कब मनोरोगी बना देगी पता ही नहीं चलेगा। आज भी मनोरोगियों और अवसाद में जीने वालों की कमी नहीं है। अगर हमने समय रहते ध्यान नहीं दिया तो यह अवसाद और भी भयंकर रूप ले लेगा।

उन्होंने कहा कि अभी लोग शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर बहुत ध्यान दे रहे हैं किन्तु मनोबल में वृद्घि करने के उपायों पर उनका जरा भी ध्यान रहीं है। समय की मांग है कि अब हम वायुमण्डल में शुभ भावनाओं के शुद्घ प्रकम्पन फैलाएं। अध्यात्म को अपनाएं। आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए हम राजयोग मेडिटेशन को जीवन का हिस्सा बनाएं।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254


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Source: BK Global News Feed

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