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दादीजी का मूलमंत्र – निमित्त, निर्मान व निर्मल वाणी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
दादीजी का मूलमंत्र – निमित्त, निर्मान व निर्मल वाणी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ की भूतपूर्व मुख्य प्रशासिका दादी प्रकाशमणि जी की 13वीं पुण्यतिथि मनाई गई।
बहनों ने दादी को अपने स्मृति रूपी पुष्पों से दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
दादी की स्मृति पर बनाए गए प्रकाश स्तम्भ को सम्मुख रख उनकी शिक्षाओं को किया याद

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बिलासपुर, टिकरापाराः- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईष्वरीय विष्व विद्यालय की भूतपूर्व मुख्य प्रशासिका आदरणीया राजयोगिनी दादी प्रकाशमणी जी की 13वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर दादी जी को भोग लगाया गया। माउण्ट आबू में स्थित दादी की यादगार में बने प्रकाशस्तम्भ का प्रतिरूप सेवाकेन्द्र में भी बनाया गया है। जिसमें दादीजी की शिक्षाएं भी लिखी हुई हैं। ब्र.कु. मंजू दीदी जी एवं अन्य बहनों ने स्मृतियों रूपी पुष्पों से दादी जी को श्रद्धांजलि दी एवं उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं को धारण किया।
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने दादीजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दादीजी मातृवात्सल्य की धनी रहीं। संस्था के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्माबाबा ने 1969 में संस्था की बागडोर उन्हें सौंपी। दादीजी जी ने इस संस्था को परिवार की तरह सम्भाला। लगभग 38 वर्षों के उनके नेतृत्व व कुशल मार्गदर्शन में संस्था के द्वारा परमात्म संदेश को केवल भारत ही नहीं अपितु विश्व के अनेक देशों तक पहुंचाया गया। उनके अंदर सभी के प्रति समभाव था, कभी किसी के प्रति किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं था। विश्व में शांति की स्थापना के उनके अथक प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें शान्तिदूत पुरस्कार से सम्मानित किया।
दीदी ने बतलाया कि दादी जी की पुण्यतिथि को विश्व-बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया जाता है। दादी जी कर्मयोगी थीं उनके जीवन की मूल शिक्षा यही थी कि – निमित्त भाव, निर्मान स्वभाव व निर्मल वाणी। सदा आत्मा के स्वमान में रहो और सबको सम्मान दो।
स्मृति-वन के निकट राजकिशोर नगर स्थित शिव-अनुराग भवन में भी ब्र.कु. रूपा बहन व शशी बहन ने दादी जी को अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

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