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विघ्न विनाशक बनने के लिए श्रीगणेश के जीवन से सीख लेने की जरूरत… – ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट्यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

विघ्न विनाशक बनने के लिए श्रीगणेश के जीवन से सीख लेने की जरूरत…
– ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी

रायपुर, 23 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि श्री गणेश की तरह जीवन को विघ्नविनाशक और महान बनाने के लिए उनके जीवन से सीख लेने की आवश्यकता है। उनका व्यक्तित्व अनेक रहस्यों को समेटे हुए है। हम वर्षों से उनकी पूजा करते आए हैं किन्तु फिर भी जीवन में बुराइयाँ व्याप्त हैं। जब उनके गुणों और विशेषताओं को धारण करेंगे तब हमारा जीवन भी उनके समान मंगलकारी बन जाएगा।

ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट्यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था-गणेश चतुर्थी का आध्यात्मिक रहस्य। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने आगे कहा कि श्री गणेश जी को सफलता का दूत माना जाता है। लोग बड़ी श्रद्घा से उनकी स्थापना कर पूजा करते हैं। लेकिन आज हम उनके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य को समझने का प्रयास करेंगे। जो कि बहुत ही गहरा और सूक्ष्म है। सृष्टि के इतिहास में ऐसा भी समय आता है कि जब हम मनुष्य आत्माएं देह अभिमान में आकर परमात्मा द्वारा दी जा रही शिक्षाओं का विरोध करने लग जाते हैं। तब वह हमारे देह अभिमान रूपी अहंकार को खत्म कर एक नयी दिव्य और श्रेष्ठ बुद्घि हम सबको देते हैं। जब हम ज्ञानयुक्त और श्रेष्ठ बुद्घि द्वारा कार्य करते हैं तो हमारा हरेक कर्म श्रेष्ठ हो जाता है। इसीलिए गणेश को बुद्घि का देवता भी कहा गया है।

ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने कहा कि गणेश जी उनका भव्य मस्तक बुद्घिमत्ता का सूचक है। उनके घुमावदार सूड़ से शिक्षा मिलती है कि जीवन में परिस्थितियों के अनुसार हमें भी लचीला और मजबूत बनना है। उनको एकदन्त भी कहा जाता है। यह शिक्षा देता है कि हम सभी को एक समान समझे। किसी से भेदभाव न करें। गणेश जी का बड़ा पेट समाने की शक्ति का प्रतीक है। कोई व्यक्ति जब किसी बात को अपने अन्दर नहीं समा पाता तो कहने में आता है कि इसके पेट में तो कोई बात पचती ही नहीं है। जब हम अपने जीवन में समाने की शक्ति को धारण करते हैं तो अनेक प्रकार की मनमुटाव और रिश्तों में कड़ुवाहट से बच जाते हैं।

उन्होंने कहा कि गणेश का कान सूपे जैसा होता है जो कि हमें शिक्षा देते हैं कि सूपे की तरह अच्छाइयों को धारण करना है और बुराइयों को निकाल फेंकना है। उनके एक हाथ में कुल्हाड़ी दिखाते हैं ताकि उनके समान अपने जीवन से निगेटिविटी को काटकर फेंक सकें। एक अन्य हाथ में कमल का फूल दिखाते हैं। जिस तरह कमल का फूल कीचड़ में रहते हुए भी उससे अलग उपर उठा हुआ रहता है। उसी तरह हमें भी अपने जीवन को संसार रूपी कीचड़ में रहते हुए कमल फूल की तरह न्यारा और प्यारा बनाना है।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254


सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

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