Uncategorized

काम क्रोध आदि विकारों की गुलामी से मुक्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता … ब्रह्माकुमारी भावना दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

काम क्रोध आदि विकारों की गुलामी से मुक्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता … ब्रह्माकुमारी भावना दीदी

रायपुर, 16 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने कहा कि काम क्रोध लोभ मोह और अहंकार रूपी विकारों की गुलामी से मुक्त होकर ही सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव हो सकता है। श्रेष्ठ चरित्रवान जीवन ही सुखी जीवन का आधार है। चरित्रवान और निर्विकारी जीवन बनाने के लिए राजयोग मेडिटेशन सबसे अच्छा माध्यम है।

ब्रह्माकुमारी भावना दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था: सच्ची स्वतंत्रता। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

ब्रह्माकुमारी भावना दीदी ने बतलाया कि चीन में ऐसी मान्यता है कि यदि आप अच्छे कर्म करेंगे तो अगला जन्म भारत में होगा। इस तरह से हम सब भारतवासी बहुत अधिक भाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म भारत देश में हुआ है। यह देश ऋषि मुनियों और देवताओं की भूमि है। यहाँ की सीमा में प्रवेश करते ही यहाँ की आध्यात्मिकता सबको आकर्षित करती है। आज भौतिक दृष्टि से हमारा देश उन्नति की ओर अग्रसर है। लेकिन जो सपना स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देखा था वह पूरा नहीं हो पाया है।

उन्होंने कहा कि आज का इन्सान भौतिक साधनों का गुलाम बन चुका है। वह इन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए ठगी और बेईमानी करने से भी नहीं चूकता। उसने अपने चरित्र रूपी बहुमूल्य खजाने को गंवा दिया है। उसने अपनी सच्ची स्वतंत्रता को खो दिया है। लार्ड मेकाले ने लिखा है कि भारत देश बहुत ही महान और आध्यात्मिक दृष्टि से समृद्घ देश है। यहाँ के लोगों को अगर गुलाम बनाना है तो यहाँ की आध्यात्मिक संस्कृति को मिटाना होगा। उसके लिए जरूरी है कि अंग्रजी सभ्यता को अच्छा बताते हुए उसे बढ़ावा दिया जाए। ताकि यहाँ के लोग अपनी संस्कृति को भूल जाएं और पाश्चात्य सभ्यता का अनुकरण करने लग जाएं। इस तरह से अंग्रेज अपनी योजना में सफल हो गए और इस देश को गुलाम बना लिया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय युवा पीढ़ी ने पाश्चात्य संस्कृति को ही अपना धरोहर मान लिया है। वह इन्द्रियों का गुलाम बनकर अपनी आध्यात्मिक संस्कृति को भूला बैठा है। पाश्चात्य संस्कृति का गुलाम होकर सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव नहीं कर पा रहा है। अनाचार भ्रष्टाचार के साथ साथ काम क्रोध आदि विकारों से मुक्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता है। आज जरूरत इस बात की है कि हम अपनी आध्यात्मिक संस्कृति को अपनाकर इस देश को फिर से उसका खोया हुआ गौरव वापस लौटाएं।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254

सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

Comment here