Uncategorized

क्रोध से शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से नुकसान… ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

१. क्रोध से शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से नुकसान… ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी
२. जीवन में क्षमाभाव का होना जरूरी… ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी

रायपुर, 15 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी ने कहा कि क्रोध हमारे नकारात्मक विचारों का प्रवाह मात्र है। क्रोध से बचने के लिए अपने विचारों को नई दिशा देने की जरूरत है। जब भी ऐसी परिस्थिति आए दो मिनट के लिए रूक जाएं। उसके बाद जब आपका मन शान्त हो जाएगा तब निर्णय करें कि मुझे क्या करना है? शान्त चित्त होने से सही निर्णय कर सकेंगे। हमारे जीवन में क्षमाभाव भी होना जरूरी है। जितना हमारे अन्दर क्षमाभाव होगा उतना ही हमारा जीवन सरल होगा।

ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था: क्रोध पर नियंत्रण। इस वेबसीरिज का प्रसारण शान्ति सरोवर रायपुर के चैनल पर किया जाता है।

ब्रह्माकुमारी रीतू दीदी ने बतलाया कि मेडिकल साइन्स भी यह कहता है कि एक बार क्रोध करने से हमारे मन पर बहत्तर घण्टे तक उसका दुष्प्रभाव बना रहता है। जिस समय व्यक्ति क्रोध करता है उस समय उसकी हृदय गति बढ़ जाती है। उसका रक्तचाप भी बढ़ जाता है। लेकिन गुस्से को दबा लेना भी उचित नहीं है। जो लोग गुस्से को दबा लेते हैं वह फिर मनोरोगी बन जाते हैं।

उन्होंने क्रोध के कारणों का विश्लेषण करते हुए कहा कि सारे विश्व में ऐसा कोई मनुष्य नहीं होगा जिसको कभी गुस्सा न आता हो। जब मनमुआफिक काम नहीं होता है तो लोगों को गुस्सा आ जाता है। उसी प्रकार कई लोग जिद्दी होते हैं उन्हें लगता है कि मैं ही ठीक हूँ। मेरी ही बात मानी जानी चाहिए। तो इस प्रकार की मानसिकता भी क्रोध का कारण बनती है। जब हमारे शरीर में पित्त की वृद्घि हो जाती है तो उस अवस्था में भी मनुष्य चिड़चिड़ा हो जाता है। चिकित्सकों का मानना है कि क्रोध करने से अन्त:स्त्रावी प्रणाली पर बुरा प्रभाव पड़ता है। परिवार में अशान्ति हो जाती है। इस प्रकार क्रोध करने से शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से नुकसान होता है। इसलिए सबसे पहले ध्यान रखें कि हमें गुस्सा न आए।

उन्होंने कहा कि क्रोध हमारे नकारात्मक विचारों का प्रवाह मात्र है। यदि हमें क्रोध को नियंत्रित करना आ गया तो हम क्रोधमुक्त बन सकते हैं। क्रोध से बचने के लिए अपने विचारों के प्रवाह को नई दिशा देने की जरूरत है। उन्होंने बतलाया कि जब भी ऐसी परिस्थिति आए दो मिनट के लिए रूक जाएं। उसके बाद प्रतिक्रिया दें। दो मिनट रूकने के बाद जब आपका मन शान्त हो जाएगा तब निर्णय करें कि मुझे क्या करना है? शान्त चित्त होने से सही निर्णय कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि हमें किसी किसी भी बात में तुरन्त प्रतिक्रिया नहीं देनी है। हरेक परिस्थितियों में हमें सकारात्मक रहना है। जरा भी निगेटिविटी अपने विचारों में नही लाना है। हमारे जीवन में क्षमाभाव का भी होना जरूरी है। जितना हमारे अन्दर क्षमाभाव होगा उतना ही हमारा जीवन सरल होगा।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254


for media content and service news, please visit our website-
www.raipur.bk.ooo

Source: BK Global News Feed

Comment here