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श्रीकृष्ण के दैवी गुणों और विशेषताओं को जीवन में उतारने का प्रयास करें… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

श्रीकृष्ण के दैवी गुणों और विशेषताओं को जीवन में उतारने का प्रयास करें…
ब्रह्माकुमारी सविता दीदी

रायपुर, 13 अगस्त: वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि विज्ञान के इस युग में श्रीकृष्ण की जयन्ती मना लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके दैवी गुणों और विशेषताओं को जीवन में उतारने का प्रयास किया जावे। गीता में बतलाए अनुसार अपने अन्दर छिपे हुए शत्रुओं काम, क्रोधादि विकारों का नाश करने से ही छोटी-मोटी बातों के लिए घर-घर में जो महाभारत चल रहा है, उसे समाप्त कर सकेंगे।

ब्रह्माकुमारी सविता दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर (Towards a new thinking) में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था: जन्माष्टमी-स्वर्णिम युग का उदय (Janmashtami-Rise of Golden Age)।

उन्होंने आगे कहा कि श्रीकृष्ण का चित्र सबके मन को मोह लेता है। उसे मनमोहन, चितचोर आदि नामों से पुकारते हैं। श्रीकृष्ण सर्व गुण सम्पन्न, सोलह कला सम्पूर्ण निर्विकारी देवता थे। इसलिए वह आज भी सबको आकर्षित करते हैं। अधिकतर चित्रों में श्रीकृष्ण को मटकी फोड़कर मक्खन खाते हुए दिखलाते हैं। जिसके आध्यात्मिक रहस्य को हम समझने का प्रयास करेंगे। यहाँ मटकी शुद्घ बुद्घि का प्रतीक है और मक्खन ज्ञान अमृत का सूचक है। जो हमें प्रेरणा देती है कि हम भी ज्ञान रूपी मक्खन का अदान-प्रदान कर स्वयं के साथ साथ सभी के जीवन को मिठास से भर दें।

उन्होंने बतलाया कि अर्जुन का अर्र्थ होता है ज्ञान अर्जन करने वाला। श्रीकृष्ण जयन्ती और गीता की सार्थकता इसी में है कि हरेक मनुष्य अर्जुन बने और गीता का अच्छी तरह से विवेचन कर उसे आत्मसात करने का प्रयास करे। कोई भी मनुष्य किसी का शत्रु नहीं होता है। इसका स्पष्ट उल्लेख भगवतगीता में मिलता है जिसमें लिखा है कि हे अर्जुन मनुष्य के अन्दर व्याप्त काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार ही उसके शत्रु हैं। जब हम इन विकारों पर विजय प्राप्त कर लेंगे तभी हम सुख और शान्ति से रह सकेंगे।

ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि गीता के माध्यम से समाज को यह सन्देश दिया गया है कि परमात्मा के साथ प्रीत बुद्घि होकर रहो क्योंकि इससे ही परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने में परमात्मा की मदद मिल सकेगी। काम, क्रोधादि विकार मनुष्य को हैवान बना देते हैं। समाज में जो हिंसा, अत्याचार, लूटपाट और भ्रष्टाचार आदि की घटनाएं घटित हो रही हैं, उसके पीछे इन्हीं मनोविकारों की प्रमुख भूमिका होती है। इन विकारों पर जीत प्राप्त करने के लिए मन की शुद्घता जरूरी है। राजयोग मेडिटेशन से इसमें बहुत मदद मिलती है। राजयोग के द्वारा मनोविकारों पर सहज ही विजय प्राप्त किया जा सकता है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में इस परमात्मा को भोग लगाया गया। इस दौरान श्रीकृष्ण की आकर्षक झाँकी का अनावरण भी किया गया।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254

सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

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