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आहार, विहार व विचार के शुद्धिकरण से होगा श्रीकृष्ण का आह्वान – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
आहार, विहार व विचार के शुद्धिकरण से होगा श्रीकृष्ण का आह्वान – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
श्रीकृष्ण समान देवत्व, मुस्कान व सकारात्मकता बनाए रखें..
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में दूसरे दिन भी मनाया जन्माष्टमी का पर्व
मक्खन व फलों का लगाया गया भोग…

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बिलासपुर, टिकरापाराः- आज अनेक स्थानों पर श्रीकृष्ण की झांकियां सजी होंगी।हमें यह भी सोचना चाहिए कि श्रीकृष्ण का जीवन झांकियों के योग्य किस आधार पर बना। हम झांकी तो देख लेते हैं पर अपने जीवन में नहीं झांकते। यह गौर नहीं करते कि हमारे जीवन में कितनी महानता आई है। यदि सच्चे दिल से श्रीकृष्ण आह्वान करना है तो हमें अपने आहार, विचार व व्यवहार को शुद्ध करने की आवश्यकता है। आज सभी के हृदय रूपी सिंहासन पर किसी न किसी विकार का अधिकार जमा हुआ है तब एक राज्य में दो राजा कैसे हो सकते हैं? आज के दिन बिजली के बल्बों आदि से डेकोरेषन करके उजाला तो करते हैं लेकिन आत्मा रूपी बल्ब तो फ्यूज़ हो चुका है। बाहर तो रौशनी है लेकिन आत्मा रूपी चिराग के नीचे अंधेरा है। आज जरूरत है श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाकर दुख-अषान्ति के अंधेरे को दूर करने की। यही जन्माष्टमी मनाने की सार्थकता होगी।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में आयोजित जन्माष्टमी उत्सव के दूसरे दिन साधकों को ऑनलाइन सम्बोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही।
अवसाद से मुक्त होने के लिए श्रीकृष्ण सबसे बड़े आदर्ष…
दीदी ने कहा कि आज हमें कुछ प्राप्त नहीं होता या हमारे पास जो है वह यदि खो जाता है तब हम हताष-निराष हो जाते हैं और अपने जीवन में तनाव या अवसाद को आने के लिए स्थान बना देते हैं। लेकिन श्रीकृष्ण के जीवन में कितना कुछ छूटने के बाद भी वे हताष व निराष नहीं हुए उनके जीवन में बड़े विकार तो दूर किसी से मोह व आसक्ति भी नहीं थी। पहले मां छूटी फिर पिता छूटे फिर नंद-यषोदा मिले लेकिन वह भी छूट गए, राधा भी छूटी, बचपन के साथी भी छूटे, गोकुल-मथुरा भी छूट गया लेकिन फिर भी उनके जीवन से सकारात्मकता व देवत्व का गुण नहीं छूटा और चेहरे पर सदा मुस्कान ही रही।
दिव्य गुणों की धारणा से हम भी बन सकते हैं परमात्मा के मददगार…
गीता में दिए अपने वचन के अनुसार वर्तमान संगमयुग पर स्वयं परमपिता परमात्मा अवतरित होकर ऐसी सुख-शांति-आनंद से परिपूर्ण रंग-बिरंगी दुनिया की स्थापना कर रहे हैं जिसका मुख्य आधार है संस्कार परिवर्तन एवं पवित्रता। श्रीकृष्ण ऐसी स्वर्णिम दुनिया प्रथम राजकुमार होंगे। श्रीकृष्ण की सोलह कलाएं संपूर्ण पवित्रता की निषानी है। परमात्मा ने ऐसे सुखमय संसार की स्थापना का उद्देष्य हमें भी दिया है विकारों की अति से मुक्त होकर, पवित्रता को अपनाकर व दिव्य गुणों की धारणा कर हम भी ऐसे पुनीत कार्य में मददगार बन सकते हैं।
मक्खन व फल खिलाकर लगाया भोग…
मंजू दीदी एवं अन्य सभी बहनों ने मिलकर श्रीकृष्ण के रूप में सजे बालकृष्ण की आरती उतारी व फलों का भोग लगाया। आज भी गौरी बहन ने एक राधा एक मीरा…, श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम….गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। ऑनलाइन जुड़े सभी साधकों ने पूरे कार्यक्रम का लाभ लिया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

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