Uncategorized

परिस्थितियों के अनुरूप अपने को ढालना सीखें- ब्रह्माकुमारी अंशू दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

परिस्थितियों के अनुरूप अपने को ढालना सीखें- ब्रह्माकुमारी अंशू दीदी

रायपुर, 10 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी अंशू दीदी ने कहा कि हमारा जीवन पानी के जैसा होना चाहिए। उसे जिस बर्तन में डाला जाएगा, वह उसी के आकार में अपने को ढाल लेता है। इसी प्रकार हमें भी अपने को परिस्थितियों के अनुरूप ढालना आना चाहिए। अपने जीवन को सरल बनाने के लिए हमें अपनी अच्छाइयों पर फोकस करना होगा।

ब्रह्माकुमारी अंशू दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से ६.००6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर (Towards a new thinking) में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था-व्यस्त रहो, मस्त रहो (Be Busy Live Easy)।
उन्होंने आगे कहा कि हमारा पहला सिद्घान्त होना चाहिए कि एक मन, एक कार्य। यह तभी होगा जब एक समय में एक ही कार्य में मन को केन्द्रित करें। मेरा मन कार्यालय में बैठकर इधर-उधर नहीं भटके। मेरा पूरा ध्यान कार्यालय के कार्यों में लगे। इसी प्रकार जब घर में आएं तो अपना सौ प्रतिशत घर में ध्यान दें। आफिस का कुछ भी कार्य घर में याद न आए।

उन्होंने प्रवचन की शुरूआत सुबह की घटना से करते हुए बतलाया कि जब उन्हें एक बच्ची ने गुड मार्निंग किया तो बच्ची से उन्होने पूछा कि क्या आपकी मार्निंग गुड है? इस पर बच्ची ने जो जवाब दिया उसे सुनकर वह स्तब्ध रह गईं। बच्ची ने बतलाया कि उसेहमेशा पढ़ाई का तनाव बना रहता है, कभी होमवर्क का तनाव रहता है, कभी परीक्षा आ जाती है, इन सभी तनावों के बीच में उसकी मार्निंग अच्छी कैसे हो सकती है? इससे साफ है कि सुबह भले ही अच्छी न हो लेकिन हम लोग नियम प्रमाण शुभ इच्छा जरूर जाहिर करते हैं। आजकल यह फैशन बन गया है? अब हमें प्रैक्टिकल में अपनी सुबह को गुड बनाना है।

उन्होंने आगे बतलाया कि मन में जो पुरानी बातें गांठ बनकर रही हुई हैं उन्हें बाहर निकालने का पुरूषार्थ करें। पुरानी बातों को मन में न रखें। इससे मन में नया उमंग उत्साह भर जाएगा। इसे अपने जीवन का सिद्घान्त बना लें कि मुझे बीती बातों को भूल जाना है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा को अपना साथी बना लें। ईश्वर विश्वासी बनें। हमें ईश्वर पर पूरा विश्वास रखना चाहिए। ऐसा जीवन बनाएं कि हमारा जीवन परमात्मा के सिवाय किसी अन्य पर निर्भर न रहे। किसी भी रिश्ते-नातों पर भी निर्भर न हों। कहा जाता है कि हम हिम्मत का एक कदम बढ़ाते हैं तो परमात्मा हजार कदमों से हमारे काम में मददगार होते हैं।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254

सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

Comment here