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खुशी का खजाना हमारे अन्दर छिपा है, उसे बाहर न ढूंढें – ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी

सादर प्रकाशनार्थ

ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा यू-ट््यूब पर प्रतिदिन प्रसारित वेब सीरिज –

खुशी का खजाना हमारे अन्दर छिपा है, उसे बाहर न ढूंढें – ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी

रायपुर, 09 अगस्त: राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी ने कहा कि खुशी का खजाना हमारे अन्दर छिपा है और हम उसे बाहर वस्तुओं आदि में खोज रहे हैं। भौतिक पदार्थों से स्थायी खुशी नही मिल सकती है। जीवन में स्थायी खुशी राजयोग से ही प्राप्त की जा सकती है।

ब्रह्माकुमारी सौम्या दीदी आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के रायपुर सेवाकेन्द्र द्वारा सोशल मीडिया यू-ट््यूब पर प्रतिदिन शाम को 5.30 से 6.00 बजे प्रसारित होने वाले आनलाईन वेबसीरिज एक नई सोच की ओर (Towards a new thinking) में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। विषय था-अपने अन्दर के खजाने को खोलें (Unlocking the treasures of life)।

उन्होंने आगे कहा कि आधुनिक युग में शापिंग माल्स में एक ही कैम्पस में भौतिक सुख के सभी साधन मौजूद रहते हैं। उसी प्रकार हमारे जीवन में भी सुख के सभी खजाने मौजूद हैं किन्तु उनका परिचय न होने के कारण हम उनका लाभ प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। आज हम चर्चा करेंगे कि जीवन के वास्तविक खजाने क्या हैं? और उन खजानों से हम कैसे लाभ प्राप्त करें? कुछ लोगों का मानना है कि धन एक ऐसा माध्यम से जिससे कि समस्त खुशियाँ खरीदी जा सकती हैं? किन्तु फिर मन में सवाल उठता है कि क्या इस दुनिया में जितने धनवान हैं वह सभी लोग सुखी हैं? जवाब है नहीं।

उन्होंने बतलाया कि दुनिया में ऐसे भी लोग हैं जो कि प्रखर वक्ता हैं क्या वह लोग सुखी हैं? इसी प्रकार कई लोग शारीरिक रूप से बहुत मजबूत हैं क्या वह लोग सुखी हैं? इनसे यह तो स्पष्ट है कि सुख इन बाहरी बातों में निहित नहीं हैं? दरअसल जो हमारे मन को शान्ति की अनुभूति कराए वही वास्तविक खजाना है। इस दुनिया की कोई भी चीज हमें स्थायी खुशी और सुख प्रदान नहीं कर सकती। सच्ची खुशी प्राप्त करने के लिए अपने अन्दर झाँकना होगा।

उन्होंने आगे बतलाया कि हमारे अन्तर्मन में निहित शक्तियों को जागृत करने के लिए राजयोग मेडिटेशन बहुत अच्छा माध्यम है। सुख और शान्ति हमारे गले का हार है। जीवन मे सबसे बड़ा खजाना है शान्ति का खजाना। अगर मन में शान्ति नहीं है तो सारे खजाने व्यर्थ हैं। सभी मन की शान्ति चाहते हैं किन्तु लाखों करोड़ों रूपया खर्च करके भी इसे प्राप्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने बतलाया कि इस शान्ति के खजाने को खोलने के लिए चाबी है आध्यात्मिक ज्ञान। हमें बाह्य जगत की तमाम नालेज है। जिन चीजों की हम कल्पना नहीं कर सकते थे वह आज हमारे हाथों में है। यह ज्ञान हमें बुद्घिजीवी बना सकती है किन्तु मन की शान्ति का अनुभव करने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान चाहिए। इस शरीर को चलाने वाली आत्मा का ज्ञान और परमपिता परमात्मा का यथार्थ परिचय चाहिए।

प्रेषक: मीडिया प्रभाग
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
रायपुर फोन: 0771-2253253, 2254254

सबका भला हो, सब सुख पाएं

Source: BK Global News Feed

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