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विष्व पर्यावरण दिवस पर टिकरापारा में रंगोली सजाकर व वटसावित्री व प्रकृति की वंदना की गई।

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
मानसिक प्रदूषण ही पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य व मूल कारण है – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
विष्व पर्यावरण दिवस पर टिकरापारा में रंगोली सजाकर व वटसावित्री व प्रकृति की वंदना की गई।
‘‘कोविड-19 की पुकार : प्रकृति से सद्व्यवहार’’ विषय पर हुई कार्यषाला
ऑनलाइन सत्संग में दिया गया मन की स्वच्छता व पृथ्वी को हरा भरा बनाने पर जोर
सेवाकेन्द्र के आनंद वाटिका प्रांगण में लगे 150 से अधिक पौधों का किया जा रहा पोषण
अंगूर की बेलों में लगे अंगूर के गुच्छे कर रहे आनंदित
वाटिका में औषधीय, फूल व फलदार, सजावटी पौधे शामिल

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बिलासपुर, टिकरापाराः- आज विश्व पर्यावरण दिवस एवं वट सावित्री पूर्णिमा व्रत के अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में कार्यषाला का आयोजन किया गया। जिसमें ‘‘कोविड-19 की पुकार : प्रकृति से सद्व्यवहार’’ विषय पर विचार मंथन हुआ व सेवाकेन्द्र के आनंद वाटिका प्रांगण में रंगोली सजाकर बरगद के पौधों व प्रकृति की वंदना की गई।
सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कहा कि पर्यावरण के सभी तत्वों के प्रदूषण का मुख्य व मूल कारण मन का प्रदूषण है। हमारे मन के विचारों व ईर्ष्या, घृणा, वैर, विरोध, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार जैसे विकारों का पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए हमें अपने मन की भावनाओं व विचारों को शुद्ध, शांत व विकारमुक्त बनाना जरूरी है। इसके लिए स्वयं को समय देना, सकारात्मक चिंतन करना, प्रकृति के सानिध्य में मेडिटेषन से उन्हें अच्छे प्रकम्पन्न देने की आवष्यकता है। इसके लिए संस्था के कृषि एवं ग्राम विकास प्रभाग व सोषल एक्टिविटी ग्रुप के माध्यम से विष्वभर के सेवाकेन्द्रों में समय प्रति समय विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
पर्यावरण की शुद्धता के लिए कोई न कोई विधि जरूर अपनाएं
दीदी ने आगे कहा कि आज सभी को पता है कि प्रकृति का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। भक्ति में वट सावित्री की पूजा का एक यह भी महत्व है कि एक वट का वृक्ष लगभग हजार लोगों के लिए प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करता है। इसलिए प्रकृति की रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है। एक वृक्ष चार व्यक्तियों को जीवन भर के लिए ऑक्सीजन प्रदान करता है। अतः यदि हम एक वृक्ष काटते हैं तो हम चार व्यक्ति को मार देते हैं इसके विपरीत यदि हम एक वृक्ष लगाते और उसकी रक्षा करते हैं तो चार व्यक्ति को जीवनदान देते हैं। हम कई विधि अपनाकर पर्यावरण के लिए योगदान दे सकते हैं। जैसे कोई त्योहार, सालगिरह, व्रत, पूजा इत्यादि अवसर पर किसी को कोई गिफ्ट देना हो, वो जरूर दें लेकिन साथ ही एक पौधा भी उपहार में जरूर दें ऐसे ही स्वयं के सालगिरह के मौके पर भी एक वृक्ष लगाकर उसे जीवित रखने, देख-रेख करने के लिए संकल्पित जरूर हों।
प्राकृतिक संतुलन को न बिगाड़ें – शरद बल्हाल
इस अवसर पर उपस्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय सदस्य शरद बल्हाल जी ने कहा कि प्रकृति के दोहन से पृथ्वी का गुरूत्वाकर्षण बल कम होता जा रहा है। आज मनुष्य प्रकृति का दोहन इस प्रकार कर रहा है जिसके लिए उसके जीवन में पश्चाताप के अलावा और कुछ नहीं बचेगा, जिस प्रकार मुर्गी और सोने के अण्डे की कहानी में मुर्गी के मालिक को पश्चाताप् के अतिरिक्त कुछ नहीं बचा। चूंकि प्राकृतिक संतुलन को हमने ही बिगाड़ा है इसलिए सुधारना भी हमारा ही कर्तव्य है। प्रकृति को बिगाड़ने व फिर से उसे बनाने में समय, ऊर्जा व धन सभी का व्यय हो रहा है। अतः अब से हमें ध्यान रखना है कि प्रकृति को हानि न पहुंचाये।
प्रतिदिन सायं आयोजित ऑनलाइन सत्संग में जुड़े अनेक लोगों को भी मंजू दीदी जी ने ‘पर्यावरण को स्वच्छ बनाएं-आओ पेंड़-पौधे लगाएं’ का नारा लगाते हुए संदेश दिया कि उक्त उपायों को अपनाकर सभी भाई-बहनें  पर्यावरण का मित्र जरूर बनें और किसी न किसी प्रकार से पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचायें।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

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