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टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर हुई संगठन शक्ति के महत्व पर कार्यशाला

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
संगठन के लिए आपसी प्रेम जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
टिकरापारा सेवाकेन्द्र पर हुई संगठन शक्ति के महत्व पर कार्यशाला
ब्रह्माकुमारी बहनों ने अपने अनुभवों के आधार पर दिए विचार

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बिलासपुर, टिकरापाराः- हर शक्ति को धारण करने के लिए किसी न किसी गुण को धारण करना जरूरी है। जैसे समाने की शक्ति के लिए गंभीरता का गुण जरूरी है। संगठन में रहने के लिए सहनषक्ति व समाने की शक्ति की आवष्यकता होती है और इसके लिए हमारे अंदर प्रेम के गुण का रहना बहुत जरूरी है। जिससे प्रेम होता है उसकी बड़े से बड़ी बात भी सहन कर लेते हैं और जिससे प्रेम नहीं उसकी छोटी गलती भी सहन नहीं कर सकते। बड़े संगठन या आध्यात्मिक संगठनों में पवित्रता का बहुत महत्व है। पवित्रता हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है। दुष्मन भी अकेला देखकर ही वार करता है संगठन पर वार करने की कोई भी हिम्मत नहीं करता। कोरोना संकट से उबरने के लिए भी पूरा भारत देष संगठित व एकजुट हो गया है जिससे इस संकट पर भी हमारे देष ने काफी हद तक विजय प्राप्त कर ली है।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में स्वउन्नति के लिए ‘‘संगठन शक्ति का महत्व’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में बहनों को संबोधित करते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने सभी बहनों से उक्त विषय को लेकर अनुभव साझा करने को कहा जिस पर अन्य सभी बहनों ने अपने विचार दिए।
छोटी-छोटी बातों को दिल पर न लें – ब्र.कु. हेमवती
ब्र.कु. हेमवती बहन ने कहा कि संगठन में बहुत सी ऐसी बातें होती हैं जो एड्जस्ट करके आपस में ही सुलझाया जा सकता है। अपने बड़ों को शिकायत कर उनका समय नष्ट न करें। गरबा नृत्य संस्कार मिलन का एक अच्छा उदाहरण है जिसमें एक-दूसरे के साथ ताल मिलाया जाता है कोई गलत भी कर रहा हो तब भी उसे एड्जस्ट करके सही कर लिया जाता है।
संगठन में छोटों का कर्तव्य है अपने बड़ों को निष्चिंत व हल्के रखना – ब्र.कु. गायत्री
ब्र.कु. गायत्री बहन ने कहा कि संगठन में बड़ों की छत्रछाया में हम सुरक्षित तो रहते ही हैं लेकिन हम छोटों का भी कर्तव्य बनता है कि बड़े हमारी ओर से निश्चिंत रहें बोझिल नहीं। संगठन एक वैरायटी फूलों का गुलदस्ते की तरह है जिस प्रकार विभिन्न प्रकार के फूलों के गुलदस्तों से बना गुलदस्ता बहुत अच्छा लगता है उसी प्रकार अलग-अलग संस्कार होते हुए भी साथ रहना एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
संगठन में रहना कुछ न कुछ सीखने की प्रेरणा देता है – ब्र.कु. पूर्णिमा
ब्र.कु. पूर्णिमा बहन ने कहा कि सभी में कोई न कोई विशेषता अवश्य होती है जब हम संगठन में रहते हैं तो एक-दूसरे की विशेषता को देख उनसे उस गुण को सीखने का प्रयत्न अवश्य करते हैं और इसका लाभ सभी को मिलता है। संगठन में रहने से यह भी फायदा है कि किसी बात को लेकर किन्हीं दो में यदि मनमुटाव हो भी जाए तो वह जल्द ही मिट जाता है अकेले-अकेले रहने से बहुत समय तक कड़वाहट बनी रहती है। जिस प्रकार मात-पिता के सानिध्य में बच्चे सुरक्षित रहते हैं उसी प्रकार संगठन में बड़ों की छत्रछाया में सभी सुरक्षित रहते हैं।
संगठन की शक्ति से बड़े से बड़ा कार्य भी हो जाता है आसान – ब्र.कु. श्यामा
ब्र.कु. श्यामा बहन ने कहा कि संगठन आत्मबल भी बढ़ाता है और हमारी सेफ्टी का साधन भी है। शिवरात्रि और नवरात्रि झांकी का उदाहरण देते हुए आपने बताया कि संगठन की शक्ति से बड़े से बड़ा असंभव जैसा कार्य भी संभव हो जाता है जिसे अकेले करने की सोचना स्वप्न की तरह है। संगठन से पहाड़ जैसी बड़ी समस्या भी राई के सामान छोटी हो जाती है।
स्वभाव-संस्कार को जानते भी सभी का करें सम्मान – ब्र.कु. ईष्वरी
ब्र.कु. ईश्वरी बहन ने कहा कि जिस प्रकार झाड़ू को बिखेर देने से हम घर की सफाई नहीं कर सकते लेकिन जब उसे एक साथ बांध लेते हैं तो हम आसानी से सफाई कर लेते हैं। उसी प्रकार संगठन में एकता होने से कार्य में सफलता मिलती है। संगठन में रहने से ही हमें एक-दूसरे के स्वभाव-संस्कार का पता चलता है लेकिन जब हम आपस में सभी को सम्मान देकर चलते हैं तो संगठन में मजबूती आती है।
कार्य को अच्छे से व शीघ्रता से सम्पन्न करने के लिए आपसी सहयोग जरूरी – ब्र.कु. नीता
जिस प्रकार एक अकेली उंगली से लड्डू नहीं बनाया जा सकता उसके लिए पांचों उंगलियों व हथेली का सहयोग लगता है ऐसे ही कई कार्य ऐसे होते हैं जो आपसी सहयोग के बिना संपन्न नहीं होते। किसी भी कार्य को अच्छे से व शीघ्रता से पूरा करने के लिए हमें सहयोग की जरूरत पड़ती ही है।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

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