Uncategorized

ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन क्लास के माध्यम से युवाओं व अन्य लोगों को किया प्रेरित

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
मनोबल बढ़ाने स्वयं के प्रति जागरूकता जरूरी – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ऑनलाइन क्लास के माध्यम से युवाओं व अन्य लोगों को किया प्रेरित
प्रथम क्लास में पांच सूत्रों के माध्यम से बताया गया मनोबल बढ़ाने का तरीका

#gallery-1 {
margin: auto;
}
#gallery-1 .gallery-item {
float: left;
margin-top: 10px;
text-align: center;
width: 33%;
}
#gallery-1 img {
border: 2px solid #cfcfcf;
}
#gallery-1 .gallery-caption {
margin-left: 0;
}
/* see gallery_shortcode() in wp-includes/media.php */

बिलासपुर, टिकरापाराः- लॉकडाउन के दौरान मन को स्थिर व मजबूत बनाने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में ‘समय की पुकार – मनोबल कैसे बढ़े..?’ विषय पर ऑनलाइन क्लास कराई गई। जिसमें युवाओं सहित अन्य लोगों ने हिस्सा लिया।
ऑनलाइन मीटिंग एप के माध्यम से सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने सभी का मोटिवेषन बढ़ाते हुए कहा कि इस लॉकडाउन के समय में तनाव व अवसाद से बचने के लिए सकारात्मकता, मेडिटेषन व अपने मनोबल को बढ़ाये रखना जरूरी है तब ही हममें परिवर्तन को स्वीकार करने की शक्ति आयेगी क्योंकि परिवर्तन ही जीवन है और परिवर्तन निष्चित भी है। परिवर्तन को खुषी-खुषी स्वीकार करें। मनोबल को कमजोर करने में हमारा सबसे बड़ा शत्रु आलस्य है।
रहमदिल बन दूसरों की भी करें मदद…
दीदी ने ‘किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार…’ गीत याद दिलाकर सभी के दिल में करूणा का भाव जागृत कराते हुए कहा कि इस परिवर्तन को गरीब, जरूरतमंद व रोज कमाकर खाने वाले लोग भी खुषी-खुषी स्वीकार कर सकें इसके लिए हम सबको रहमदिल बनना होगा क्योंकि किसी इंसान की प्रथम आवष्यकता रोटी, कपड़ा और मकान होती है। शासन तो यह सुविधा देने का कार्य कर ही रहा है लेकिन यदि कोई छूट जाता है और वो आपके आसपास ही रहता है और भगवान ने आपको ऐसी क्षमता दी है तो जरूर उनकी मदद करें। सेवाकेन्द्र का उदाहरण देते हुए दीदी ने बताया कि सेवाकेन्द्र के द्वारा भी कुछ स्थानों पर ऐसे प्रयास किए गए व सेवाकेन्द्र से जिन्होंने संपर्क किया उन्हें भी अन्न का सहयोग दिया गया।
जागरूकता, संतुलन, रचनात्मकता, साक्षी दृष्टा व उमंग-उत्साह से बढ़ायें मनोबल
लॉकडाउन का अर्थ ये नहीं कि हम निद्रा में, मोबाइल या टीवी देखने में अपना समय बिताएं। जागरूकता, संतुलन, रचनात्मकता, साक्षी दृष्टा व उमंग-उत्साह के आधार पर अपने मन को ऊर्जावान बनाएं। जागरूकता अर्थात् क्या करना है व क्या नहीं करना है इसकी समझ हो। मन के लिए ज्ञान व ध्यान तथा तन के लिए शु़़द्ध भोजन व आसन-प्राणायाम जरूर करें। संतुलन की आवष्यकता हर तरह से होती है जैसे भावना व विवेक की, रमणीकता व गंभीरता की, होष व जोष क आदि। प्रतिदिन की दिनचर्या में रचनात्मकता जरूरी है क्योंकि रोज वही कार्य करने से ऊब सकते हैं। साक्षीपन जरूरी इसलिए है क्योंकि जब किसी बात का यथार्थ निर्णय लेना होता है तो साक्षीदृष्टा की स्थिति हमें बहुत मदद करती है। नहीं तो किसी निर्णय में हमें बहुत वक्त लग जाता है। और उमंग-उत्साह से बड़े से बड़ा कार्य सरलता से संपन्न हो जाता है और मेहनत का पता भी नहीं लगता।
विल पॉवर बढ़ाने के लिए केवल क्लास करना ही पर्याप्त नहीं होगा, जो हम बातें सुनते हैं उसकी गहराई में जाकर उसे जीवन में लागू भी करना होगा और स्वयं की शक्ति को पहचानना भी जरूरी है। पाणिनी का उदाहरण देते हुए दीदी ने बताया कि उन्हें बचपन में किसी हस्तरेखा शास्त्री ने कहा था कि उनके हाथों में विद्या की रेखा नहीं है लेकिन उन्होंने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर दृढ़ संकल्प की शक्ति से मेहनत की और संस्कृत व्याकरण के रचयिता बने जिनका संस्कृत व्याकरण हम आज तक पढ़ते हैं।
रोज रात को विटामिन-टी अर्थात् थैंक्स की गोली लें मतलब कि रात्रि में सोने से पूर्व परमात्मा का धन्यवाद जरूर करें क्योंकि परमात्मा ने हमें बहुत कुछ दिया है जो बहुतों को प्राप्त नहीं है। परमात्म प्रेम में स्वयं को चिंता व व्यर्थ चिंतन से आइसोलेट करके बोझमुक्त होकर उस ईष्वर की गोद में सो जाएं। व्यर्थ व नकारात्मक चिंतन से निर्णय शक्ति में कमी आती है जो हमारी एकाग्रता को कमजोर करती है। एकाग्रता न होने से हमें सफलता नहीं मिलती।
शुरूआत व अंत में सभी को मेडिटेषन का अभ्यास कराया गया। लगभग 40 लोगों ने इस क्लास का लाभ लिया। दीदी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान समय प्रति समय विभिन्न विषयों पर ऐसी क्लासेस का आयोजन किया जायेगा।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

Source: BK Global News Feed

Comment here