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Shivani Behen’s Article Published in Dainik Bhaskar Hindi Daily -24-04-2020 – आंकड़ों देखने की बजाय स्वस्थ रहने के बारे में भी सोचें

आंकड़ों देखने की बजाय स्वस्थ रहने के बारे में भी सोचें

कहीं मुझे भी न हो जाए’ बार-बार ऐसा विचार करने से नहीं होगा मुश्किलों का समाधान


हम सभी के जीवन में कोई न कोई समस्या होती है। अगर हम हमेशा यही सोचते रहेंगे कि इतनी बड़ी समस्या है, यह कभी ठीक होगी भी कि नहीं। इसका कोई समाधान है भी या नहीं। हम जितना इस प्रकार से सोचते जाएंगे, समस्या उतनी ही बढ़ती जाएगी। मैं बीमार हूं, मेरा ब्लड प्रेशर ज्यादा है, मेरा शुगर लेवल ठीक नहीं है। ऐसा हम सोचते भी जाते हैं और बोलते भी जाते हैं कि वो ठीक तो होंगे नहीं, लेकिन हो सकता है यह समस्या थोड़ी-सी और बढ़ जाएगी। क्योंकि, संकल्प से सिद्धि होती है। अगर आपके किसी रिश्ते में थोड़ी सी समस्या है तो हम वैसा ही सोचना शुरू कर देते हैं। पता नहीं क्या समस्या है, पता नहीं इनको मुझसे क्या समस्या है। मैं कितना भी कोशिश करूं ये रिश्ता तो ठीक होता ही नहीं है। पता नहीं आगे ठीक होगा भी या नहीं। ये सब हमारे विचार हैं और हम कहते हैं समस्या है तो हम इसी के बारे में सोचेंगे ना। हम ऐसा सोच-सोचकर उस रिश्ते में और टकराव पैदा कर रहे हैं। जबकि, होना तो यह चाहिए कि जो दिख रहा है, हमें वो नहीं सोचना है। हमें वो सोचना है, जो हम देखना चाहते हैं।
इसे आप जीवन के किसी भी दृश्य में इस्तेमाल कर देख सकते हैं। आप खुद को कैसे देखना चाहते हैं? आप अपने परिवार को कैसा देखना चाहते हैं? आप अपने देश को और पूरे विश्व को कैसा देखना चाहते हैं? वह सोचो। एक की भी सोच उसके नियति पर परिलक्षित होती है। सारा विश्व सोचेगा तो उसकी नियति बदल जाएगी। इस समय हमारे पास शक्ति है, हम अपनी नियति, अपने परिवार की नियति, फिर सबके साथ साझा करके अनेक की नियति पर प्रभाव डाल सकते हैं।
इस समय हम स्वयं को स्वस्थ देखना चाहते हैं। लेकिन, हम सोच क्या रहे हैं? हम यही तो सोच रहे हैं कि कहीं मुझे ना हो जाए। हम सोच रहे हैं, मैं ये करूं तो मुझे ना हो जाए। मैं इस चीज को हाथ लगाऊं तो मुझे ना हो जाए। हाथ नहीं लगाना है, बचना है, लेकिन हाथ नहीं लगाते समय ये नहीं सोचना है कि मुझे न हो जाए। जो एक्शन हम कर रहे हैं और जो सोच हम पैदा कर रहे हैं, ये दोनों अलग-अलग चीजें है। हाथ आज हम कोई पहली बार नहीं धो रहे हैं। हम रोज बहुत बार हाथ धोते हैं। दो-तीन बार ज्यादा धो रहे होंगे, इस समय। अब हर रोज आप हाथ क्यों धोते है? इन्फेक्शन, डर और बीमारियों से बचने के लिए धोते हैं। लेकिन, पहले जब हम रोज हाथ धोते थे तो हम यह नहीं सोचते थे कि कहीं मैं बीमार न हो जाऊं, कहीं मुझे वायरस न हो जाए, कहीं मुझसे किसी और को न हो जाए। हमें यह सोचना है कि मैं पूरी तरह से स्वस्थ हूं, हेल्दी हूं और अपने हाथ को धो रहा हूं।
आमतौर पर हाथ धोते समय हम यह भी नहीं सोचते हैं कि मैं हाथ धो रहा हूं। वास्तव में हम कुछ और ही सोचते-सोचते हाथ धो लेते हैं। लेकिन, इस समय हम वो रिपीटेट विचार पैदा कर रहे हैं। जो हम काम कर रहे हैं और जो हम विचार पैदा कर रहे हैं, दोनों के बारे में स्पष्टता है। अब हमें पता है कि हाथ कैसे धोना है, कैसे बैठना है, अंदर गए तो सैनेटाइज करना है। कमरे से बाहर आए तो सेनेटाइज करना है। ट्रेन में बैठे तो कैसे बैठना है।
इस एक महीने में हमें वो सारी जानकारियां मिल गई जो हमें चाहिए थी। अब सोचना कैसे है, बाहर शायद हमें कोई नहीं बताएगा। वो हमें खुद अपने आपके लिए करना होगा कि मुझे सोचना कैसे है। सबसे पहली चीज हम अपनी शब्दावली की जांच करते हैं। कई बार हमें अपने विचारों को बदलना उतना आसान नहीं होता है। लेकिन, अपने शब्दों को बदलना सरल होता है। हम तुरंत ही अपने अंदर बदलाव नहीं कर पाएंगे, इसलिए हम पहले बाहर बदलाव करते हैं। क्योंकि शब्दों पर अपने को याद दिलाना, एक-दूसरे को याद दिलाना आसान होता है। जैसे हम एक-दूसरे से कुछ बात करते हैं तो सामने वाला कहता है बस, हमने आपको सुन लिया, अब फुलस्टॉप लगाओ और कुछ दूसरी बात करो। जैसे कोई किसी के बारे में अालोचना कर रहा है तो कहते हैं, उसको छोड़ो ना क्यों उसके बारे में बात कर रहे हैं। कुछ दूसरी बात करो। हमें यह बात बिल्कुल नहीं करनी है कि यह इतना फैल गया है और एक महीना और फैलेगा। तीन महीने तक तो और भी फैल जाएगा। इतने लोग बीमार हो गए हैं, अभी और इतने बीमार होंगे। कुछ लोग हैं जिनका काम है यह गणना करना। जो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हैं, सरकार के अधिकारी हैं, उनका काम है। हमारी भूमिका है वो सोचना जिससे ये आंकड़े घटें। उसके लिए हमें इनको पहले अपने मन में और बोल में कम करना पड़ेगा। तब जाकर के वो वहां कम होगा। बहुत कम लोग हैं, जिसकी भूमिका गणना करना है। बाकी दुनिया की भूमिका है, इन आंकड़ों को खत्म करना है।

(यह लेखक के अपने विचार हैं।)

Source: BK Global News Feed

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