Uncategorized

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सारंगपुर द्वारा गीता जयंती का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया।

गीता जयंती के उपलक्ष्य में ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र पर बही गीता ज्ञान गंगा ।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सारंगपुर द्वारा राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष भ्राता धर्मेन्द्र वर्मा जी के सौजन्य से गीता जयंती का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। शोभायात्रा निकाल कर ईश्वरीय गीता ज्ञान का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में अतिथियों पूर्व विधायक गौतम जी टेटवाल,आयुध निर्माणी रक्षा मंत्रालय भारत सरकार के जे.डब्लु. एम. महोदय भ्राता आर.के.मिश्रा जी,वरिष्ठ एडवोकेट ओ.पी विजयवर्गीय जी,लायन्स क्लब अध्यक्ष महोदय अतुल जोशी जी,लायन्स क्लब रीजन चेयर पर्सन महेश शर्मा जी,राजगढ़ से पधारी जिले की प्रभारी ब्रह्माकुमारी मधु दीदी जी आदि ने ईश्वरीय स्मृति औऱ दीप प्रज्वलन कर किया ।कु.परी बागड़े ने नृत्य के माध्यम से अतिथियों का अभिवादन किया।ब्रह्माकुमारी बहनों ने तिलक,पुष्प और बैज से अतिथियो को श्रृंगारित किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजगढ़ से पधारी ब्रह्माकुमारीमधु दीदी जी ने कहा भगवान को तो सिर्फ प्रेम के बंधन में ही बाँधा जा सकता है,गोपियों की सच्ची प्रीत ही परमात्म प्यार की निशानी है।दीदी ने कहा कि जब भगवान ने गीता में उपदेश दिया कि “सर्वधर्मानि परित्यज्य मामेकं शरणं ब्रज” अर्थात सब धर्मों को छोड़ मेरी शरण आ तो मै तुझे पापों से मुक्त कर दूंगा तो आखिर किस धर्म को छोड़ने की बात कही और किस सतधर्म की स्थापना की बात कही इसको समझने की आवश्यकता है आज हमने देह के धर्मो को अपना धर्म मान लिया है जिस कारण ही द्वेष ,हिंसा,जातिवाद का जन्म होता है ।यथार्थ रूप में तो हम सर्व आत्माएं परमात्मा पिता की परमप्रिय संतान है और हमारा स्वधर्म शांति है,दैवी गुण है उन दैवी गुणों की पुनर्स्थापना हेतु,आदि सनातन देवी देवता धर्म की स्थापना के लिए परमात्मा आकर गीता ज्ञान सुनाते है,वर्तमान समय यह कर्तव्य चल रहा है बस हम सबको अर्जुन बन ज्ञानार्जन की आवश्यकता है।आयुध निर्माणी (रक्षा मंत्रालय-भारत सरकार) से पधारे आर .के.मिश्रा जी ने अपने मार्मिक उद्बोधन में कहा कि मै आज अपने आपको बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ कि मुझे इस ईश्वरीय परिवार में आने का अवसर मिला ।श्रीमद्भागवतगीता को मैंने कई बार सुना ,पठन किया पर आज गीता का सच्चा अर्थ यहाँ आकर समझ मे आया,ईश्वरीय परिवार के सभी बहन भाइयों के मस्तक में ये ज्ञान गीता कर्म व्यवहार के रूप में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है,गीता की सच्ची सार्थकता यही है क्योंकि ज्ञान तभी सार्थक है जब जीवन को परिवर्तन कर सम्पूर्ण जीवन गीता बन जाये।महेश शर्मा जी ने भी कर्म -अकर्म- विकर्म को परिभाषित कर गीता ज्ञान की महिमा की।अन्य सभी अतिथियों ने भी शुभकामनाएं अर्पित की।मधु दीदी ने धर्मेंद्र वर्मा जी के सफल आयोजन की खुले दिल से सराहना की।स्थानीय ब्रह्माकुमारी भाग्यलक्ष्मी दीदी ने कॉमेंट्री की माध्यम से राजयोग की गहन शांति अनुभूति कराई।ब्रह्माकुमार नीरज भाई ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया और गीता ज्ञान की गहराई का अनुभव जनमानस तक पहुंचाया।आभार विद्याधार कुम्भकार जी ने किया।दीदी ने सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात देकर सम्मानित किया।तदोपरांत गीता माता की महाआरती और प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन हुआ।इस अवसर पर नगर के पत्रकार बंधु,वरिष्ठजन ,माताएं बहने महादेव मित्रमंडल के सदस्य,लायंस क्लब सदस्य एवं गणमान्य उपस्थित रहे।

#gallery-1 {
margin: auto;
}
#gallery-1 .gallery-item {
float: left;
margin-top: 10px;
text-align: center;
width: 33%;
}
#gallery-1 img {
border: 2px solid #cfcfcf;
}
#gallery-1 .gallery-caption {
margin-left: 0;
}
/* see gallery_shortcode() in wp-includes/media.php */

Source: BK Global News Feed

Comment here