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YOGA IN BEIT SECL

एक दिवसीय महिला सशक्तिकरण पर कार्यशाला आयोजित

कोरबाः29.08.2019- बी.ई.टी.आई कोरबा दक्षिण पूर्वी कोयला प्रक्षेत्र कोरबा के तत्वाधान में एक दिवसीय महिला सषक्तिकरण कार्यक्रम में कार्यक्षेत्र एवं जीवन शैली का संतुलन, विषय पर कार्यशाला का शुभारम्भ दीप प्रज्जवलित करके रीक्रियेशन क्लब एस ई सी एल कोरबा में किया गया। भ्राता मदनजीत सिंह प्राचार्य बी.ई.टी.आई ने कहा कि कार्यक्षेत्र में कार्यरत महिलाओं का यदि स्वास्थ्य अच्छा होगा तो इसका प्रभाव कार्य की गुणवत्ता के साथ जीवनशैली, परिवार, समाज और देश पर भी पडे़गा। आपने कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पूरे विश्व में एक पवित्र संस्था है और इनके विचार बहुत ही शांतमय और शक्तिशाली होते हैं। हमें बड¬़ा ही हर्ष हो रहा है कि आज ब्रह्माकुमारी बहनों का सानिध्य हमें मिला है। ब्रह्माकुमारी जितेश्वरी बहन ने राजयोग एवं योगासन का अभ्यास कराते हुए कहा कि स्वास्थ्य एक बहुत बड़ी सम्पत्ति है। आज के परिवेश में पैसे कमाने की होड़ में हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं और हमारी दिनचर्या अव्यवस्थित हो जाती है। परिणाम स्वरूप हमें घातक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। पहले हम धन कमाने के लिये स्वास्थ्य को दांव पर लगाते हैं, फिर स्वास्थ्य ठीक करने के लिये पैसे को पानी की तरह बहाना पड़ता है। पहले लोग दिमाग कम तथा षारीरिक मेहनत अधिक करते थे, इसीलिये बीमारी भी कम होती थी लेकिन आजकल लोग मोबाईल, इन्टरनेट और सोसियल मीडिया के कारण शारीरिक मेहनत कम करते हैं। आपसी संबंधों में तालमेल न होने के कारण लोग एक दूसरे से दूर होते जा रहें हैं तथा परिवार विखर रहें हैं। ब्रह्माकुमारी बिन्दु बहन ने कहा कि जीवन शैली और कार्यक्षे़त्र में संयम तभी आयेगा, जब हमारा मन सषक्त होगा। इसके लिये स्वयं के कार्यक्षेत्र के ज्ञान के साथ सकारात्मक सोच, अपनापन और जिम्मेवारियों का अहसास होना आवष्यक है। आंतरिक सशक्तिकरण के लिये में हमें कुछ समय स्वयं स्वयं के साथ बिताना होगा। स्वयं के गुणों और मूल्यों को उभार कर आत्म-संयम तथा आत्म-सम्मान को बढ़ाना होगा। स्वयं को स्पष्ट, पारदर्शी तथा सरल बनाये जिससे सभी का सहयोग स्वतः ही प्राप्त होता रहेगा। समय सभी को एक जैसा ही मिला है, समय का संयोजन और आपसी मेल मिलाप से कोई भी बड़े कार्य सहज ही सफल होते हैं। यदि हम प्रातःकाल जल्दी उठें और मेडिटेशन करें तो हमारा मन भी सशक्त और शांत बन सकता है। भ्राता एल.एस. मरार प्रबंधक मानिंग एस.ई.सी.एल ने कहा कि इस तरह के प्रषिक्षण लगातार चलते रहना चाहिये। जिससे अधिकारी और कर्मचारी अपने जीवन में तथा कार्यक्षेत्र में स्वस्थ्य रहें।

Source: BK Global News Feed

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