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किसान सषक्तिकरण अभियान के अंतर्गत किसानों को शाष्वत यौगिक खेती की दी जा रही जानकारी

सादर प्रकाषनार्थ
सषक्त किसान देष की शान है – ब्र.कु. सारिका
हरित क्रांति व श्वेत क्रांति के बाद अब आध्यात्मिक क्रांति की जरूरत
किसान सषक्तिकरण अभियान के अंतर्गत किसानों को किया जा रहा जागरूक
शाष्वत यौगिक खेती की दी जा रही जानकारी

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व्यसन के दुष्प्रभावों को बताकर व्यसनमुक्ति के लिए कराया जा रहा संकल्प
ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा स्वच्छ, स्वस्थ, सषक्त, व्यसनमुक्त गांव के निर्माण से स्वर्णिम भारत की स्थापना के उद्देष्य से निकला किसान सषक्तिकरण अभियान तीसरे दिन नरियरा पहुंचा। जहां बालक व कन्या उ.मा.शाला, सरस्वती षिषु मंदिर, बनाहिल के ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय के लगभग 700 युवाओं को ग्रामीण युवा सषक्तिकरण विषय पर संबोधित किया गया और स्वच्छता, स्वास्थ्य व व्यसनमुक्ति के लिए प्रेरित किया गया। इसके पष्चात् नरियरा के प्रसिद्ध राधाकृष्ण मंदिर के प्रांगण में उपस्थित गांव के 150 किसानों व स्थानीय लोगों को प्रदर्षनी एवं व्याख्यानों के माध्यम से शाष्वत यौगिक खेती एवं ग्राम विकास के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही व्यसनमुक्ति के लिए संकल्प भी कराया गया। इसके पश्चात् सोनसरी एवं आरसमेटा में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को सषक्त बनाने की मुहिम छेड़ी गई। जहां पर स्कूलों व महाविद्यालय में वहां प्राचार्य एवं अन्य ग्रामीण स्थानों पर गांव के कृषि अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर कोल्हापुर से पधारे मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी सारिका बहन ने सभी गांव के किसानों को बताया कि पाष्चात्य देषों के अनुकरण फलस्वरूप नए-नए प्रकार की रासायनिक खादों व जहरीली कीटनाषक दवाओं के प्रयोग से हमारी धरती मां की उर्वरक शक्ति का हास होता गया। साथ ही खाद्य पदार्थों में रसायनों का दुष्प्रभाव जहर के रूप में फैलता गया जिससे अनेक नई-नई शारीरिक व मानसिक बीमारियां होने लगी। मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण नैतिक पतन हुआ। अब ऐसी परिस्थितियों में किसानों को फिर से बलराम व कृष्ण समान बनने व उत्तम बीज, उत्तम खाद व उत्तम विचार प्रयोग करने की आवष्यकता है। रासायनिक खाद त्याग कर गाय के गोबर, गउमूत्र, जैविक खाद व कम्पोस्ट खाद का स्वयं निर्माण कर धरती मां की शक्ति को पुनः बढ़ाने में सहयोग दें। खेत में बोने वाले बीज को परमात्म शक्तियों की किरणों द्वारा सषक्त बनायें, जैविक द्रव्यों के छिड़काव द्वारा पौधों का संरक्षण करें, साथ-साथ अपनी शुभ चिंतन, शुभभावना और शुभकामना द्वारा फसलों को श्रेष्ठ संकल्पों की ऊर्जा से शक्ति प्रदान करें ताकि पुनः सात्विक अन्न द्वारा मन का परिवर्तन हो और हमारे देष में सुख-शान्ति-समृद्धि का साम्राज्य आये।
कोल्हापुर से ही पधारी ब्रह्माकुमारी सारिका बहन ने परमात्मा से शक्ति लेने की विधि बताते हुए ध्यान का अभ्यास कराया और कहा कि ज्योतिस्वरूप परमात्मा षिव सर्व आत्माओं के पिता व सर्वषक्तिमान हैं। जब हम शुभचिंतन व राजयोग ध्यान से अपने मन का तार परमात्मा से जोड़ते हैं तो उनकी समस्त शक्तियां हममे प्रवाहित होने लगती हैं और हमारी प्रभामण्डल से चारों ओर का वातावरण सात्विक व शक्तिषाली बनता जाता है जो फसलों को भी शक्ति प्रदान करता है।
टिकरापारा सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्र.कु. मंजू दीदी ने सभी स्थानों पर उपस्थित किसानों को गांव की स्वच्छता के लिए प्रयत्नषील रहने, रासायनिक खाद व कीटनाषकों का प्रयोग न कर यौगिक खेती करने, गांव के कल्याण के लिए हर रोज सकारात्मक चिंतन करने, शरीर व मन की शक्ति को खत्म करने वाली बीड़ी-सिगरेट, गुटखा, शराब आदि अन्य व्यसनों का त्याग करने व समाज में दुष्मनी पैदा करने वाले कुरीति-कुरिवाजों से स्वयं को मुक्त रखने का संकल्प कराया।
किसानों के आत्मसम्मान को ऊंचा उठाने के उद्देष्य से ब्रह्माकुमारी बहनों ने किसानों को अंगवस्त्र पहनाकर व श्रीफल देकर सम्मानित भी किया।
प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक……………………….

Source: BK Global News Feed

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