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Kadma : Celebration of Janmashtami

स्वयं को ज्ञान योग के चंदन का तिलक लगा अपना आहार व्यवहार विचार का शुद्धीकरण कर श्री कृष्ण समान 16 कला संपूर्ण बनने के संकल्प के साथ जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाए तभी हम सब मिलकर स्वर्णिम समाज का निर्माण कर सकते हैं यह उद्गार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की कादमा शाखा के तत्वावधान में सेवाकेन्द्र पर आयोजित दिव्य अलौकिक व चैतन्य झांकियों के आध्यात्मिक रहस्य को स्पष्ट करते हुए सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी  वसुधा बहन ने व्यक्त किए उन्होंने कहा कि आज मानव अनेक प्रकार के जाति धर्म रंगभेद मैं फस दुखी अशांत है जिसके कारण सामाजिक परिस्थितियां बढ़ती जा रही है और समाज में नैतिकता का पतन हो रहा है इसलिए हमें आवश्यकता है श्री कृष्ण समान दिव्य गुण शक्तियां धारण करने की क्योंकि तभी हम समाज को नई दिशा व दशा प्रदान कर सकते हैं ब्रह्माकुमारी वसुधा बहन ने कहा की जब तक दिव्य गुणों की खुशबू से नर नारी का मन मंदिर नहीं बनेगा तब तक श्री कृष्ण इस धरा पर कैसे आ सकते हैं इसलिए अगर हम सचमुच श्री कृष्ण को देखना चाहते हैं उनके साथ रास करना चाहते हैं तो हमें स्वयं में झांकना होगा अध्यात्म को अपनाना होगा। उन्होंने कहा की हम हर रोज अपने दैनिक कार्य करते हुए कुछ पल स्वचिंतन वह प्रभु चिंतन के लिए अवश्य निकालें इसके लिए हमें मेडिटेशन राजयोग की अति आवश्यकता है राजयोग एक ऐसी वैज्ञानिक व आध्यात्मिक पद्धति है जिससे मन एकाग्र हो परमपिता परमात्मा से जुड़ता है वह असीम शक्तियों की अनुभूति करता है जिससे मन में सुख शांति आनंद प्रेम की अनुभूति सहज होने लगती है। इसलिए अगर हम चाहते हैं स्वर्णिम भारत का निर्माण करने की तो कुछ पल हमें खुद के लिए अवश्य निकालने होंगे तभी हमारा यह त्योहार मनाने सार्थक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर सैकड़ों लोगों ने चैतन्य झांकियों का अवलोकन किया।

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Source: BK Global News Feed

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