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मातोश्री वृद्धाश्रम में रक्षाबंधन कार्यक्रम

यह रक्षाबंधन भाई बहन के वैश्विक रिश्ते की स्मृति दिलाता है | बहन भाई के निर्मल प्रेम का प्रतिक है | आज के इस वर्तमान युग में बहन भाई को तिलक लगाती है, राखी बांधती है और भाई बहन को कुछ सौगात देकर अपनी जिम्मेवारी पूरी कर लेता है | अध्यात्मिक रहस्य छिपे इस त्यौहार को जब ऐसे मनाया जाने लगा तब परमात्म पिता इस धरती पर अवतरित होकर इसका सच्चा महात्म्य हमें समजाते है , सुरेखा बहन ने रक्षाबंधन का अध्यात्मिक रहस्य बताते हुए निकाले |

यह मस्तक पर लगाया जाने वाला तिलक आत्मिक स्मृति दिलाता है, राखी श्रेष्ट संकल्प में खुद को बांधने प्रतिक है और मिठाई खिलाना अर्थात मुख से सदा मीठे वचन निकालने का प्रतिक है |

प्रदीप सर ने कहा की ये बहने इश्वर की प्रतिनिधि बनकर के हमारे पास आई है | इनका यह कितना सराहनीय कार्य है की जो निस्वार्थ भाव से सेवा करती है | रक्षा सूत्र बांधकर हमसे उपहार में केवल कमी कमजोरी , व्यसन , विकारों का दान मांगती है | जरुर इनके ऐसे प्रयास से एक दिन विश्व परिवर्तन हो ही जायेगा |

बाद में सभी उपस्थित वरिष्ट नागरिक को राखी बंधी गई , और मुख भी मीठा कराया गया |

 

Source: BK Global News Feed

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