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राजगढ़ : श्रीमद् भगवद्गीता ज्ञान यज्ञ

तलेन महेश्वरी मंदिर मे मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़ का बीज निराकार परमपिता परमात्मा पारब्रह्म परमेश्वर हे। जो इस संसार से ऊपर परमधाम ,निर्वाण धाम में निवास करते हैं ।जिस तरह बीज को धरती में डाला जाता है तब उसकी उत्पत्ति होती है उसी तरह परमात्मा को भी इस संसार का उद्धार करने के लिए धरती पर आना पड़ता है । एवं ब्रह्मा जी के द्वारा नई सतयुगी सृष्टि की स्थापना कराते है । ब्रह्मा जी के चार मुख दिखाएं है अर्थात निराकार परमात्मा ब्रह्मा जी के द्वारा चारों ही दिशाओं में ज्ञान का प्रकाश फैलाते है ।विष्णु अर्थात जिसके अंदर विष का एक अणु भी ना हो। शंकर अर्थात जो हमेशा सत का संग करता हो । उक्त विचार सिवनी से पधारी योग शक्ति आरती दीदी ने श्रीमद भगवत गीता ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यक्त किये। इसका शूभारंभ पूजा अर्चना के द्वारा किया गया। ब्रह्माकुमारी बहनों ने आए हुए अतिथियों का तिलक पुष्प से सम्मान कीया।इस अवसर पर
, ब्रम्हाकुमारी लक्ष्मी, ब्रह्माकुमारी नम्रता ,ब्रह्माकुमारी नीलम , एवं महेश्वरी समाज की महिलाये श्रीमती लता भट्टरा ,
श्रीमती शीला , श्रीमती वीभा, श्रीमती कृष्णा , श्रीमती बंसती , श्रीमती मीणा , ने दीप प्रज्वलन कर गीता ज्ञान यज्ञ का उद्घाटन किया। वहीं ब्रह्माकुमारी लक्ष्मी दीदी ने सभी अतिथियों को ईश्वरीय सौगात ” श्रीकृष्णका चित्र ” भेंट कर सम्मानित किया ।वही गीता ज्ञान यज्ञ का समापन श्रीमद भगवत गीता की आरती कर किया गया।

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Source: BK Global News Feed

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