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कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा सेवाकेन्द्र का अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
दिनचर्या में आधे से एक घण्टे का सकारात्मक कार्य बढ़ाता है हमारी ऊर्जा – डॉ. संजय अलंग
कलेक्टर ने किया ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में साधकों को संबोधित…
सेवाकेन्द्र का किया अवलोकन, ध्यान की भी अनुभूति की।

बिलासपुर टिकरापारा, – कोई भी कार्य हो, यदि निरंतर हम दिनभर वही कार्य करते रहे तो जरूर मोनोटोनस हमें परेषान कर देगा, उस कार्य में अरूचि पैदा हो जायेगी, चिड़चिड़ाहट, थकावट या उदासी आने लगेगी इसलिए 24 घण्टे में न्यूनतम आधे से एक घण्टे के लिए उस कार्य के बीच में ब्रेक चाहिए। ब्रेक अर्थात् कोई दूसरा कार्य करना, सोना या आराम करना दूसरे कार्य की गिनती में नहीं आता। चाहे आप गार्डनिंग करें, चाहे योग करें, पूजा करने बैठ जाएं, उस दौरान मोबाइल भी छोड़ दें। इससे आपका ध्यान उस मूल कार्य से डाइवर्ट होगा  और जब दोबारा आप उस कार्य में जुटेंगे तो ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करेंगे। यह एक बहुत बड़ा मूलमंत्र है। कार्य के बीच में ब्रेक किसी से लड़ाई-झगड़ा, किसी से बातचीत भी हो सकती है लेकिन बेहतर यह है कि वह कार्य रचनात्मक हो और उस रचनात्मकता से समाज को हम कुछ दे सकें तो यह सोने पे सुहागा है। समाज को न भी दे सकें तो भी ब्रेक जरूरी ही है और कोषिष करें कि वह सकारात्मक हो। सकारात्मक नहीं भी हो तो भी ब्रेक चाहिए। आप दो ऐसे व्यक्तियों में तुलना करेंगे जो एक तो निरंतर उसी कार्य में है और एक थोड़ा ब्रेक लेकर फिर वही कार्य करता है तो आप पायेंगे कि ब्रेक लेकर कार्य करने वाला अपने कार्य में थोड़ा आगे बढ़ जाता है, खुष रहता है, सकारात्मकता बढ़ती है। मेडिटेशन या पॉज़िटिव थिंकिंग या सत्संग बेहतर रचनात्मक कार्यों में से एक है।
उक्त बातें जिले के कलेक्टर भ्राता डॉ. संजय अलंग जी ने टिकरापारा सेवाकेन्द्र में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए कही।
धैर्य सबसे बड़ा मानवीय गुण…
डॉ. अलंग ने कहा कि जीवन में धैर्य का होना बहुत जरूरी है, यह सबसे बड़ा मानवीय गुण है। संस्था की बहनों और सदस्यों में धैर्यता का गुण अपेक्षाकृत अधिक अनुभव हुआ। धैर्य का गुण लगता आसान है लेकिन है सबसे कठिन। हम रोड में ही जाकर रेड लाइट तोड़ने लगते हैं जो अधैर्यता का परिचायक है और फ्रायड के अनुसार भी लाइन को तोड़ना ही भ्रष्टाचार का मूल है। किसी चीज के लिए अपने नंबर आने तक प्रतीक्षा करना ये सबसे बड़ी मानवीय उपलब्धि है जो कि आज के समय में बहुत कम होती जा रही है। लोग बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाते, और हर चीज में पहले मैं करने का भाव आ जाता। सभी की खुषी की कामना करते हुए उन्होंने अपने वक्तव्य को विराम दिया।
सेवाकेन्द्र का अवलोकन व ध्यान अनुभूति के पश्चात् बहनों ने बांधी राखी…
डॉ. अलंग ने सेवाकेन्द्र का बारीकी से अवलोकन किया। सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने बाबा की कुटिया में उन्हेंं ध्यान की अनुभूति कराई व तत्पष्चात् रक्षासूत्र बांधकर उन्हें ब्रह्माभोजन भी कराया गया।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

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Source: BK Global News Feed

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