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सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

सादर प्रकाषनार्थ
प्रेस-विज्ञप्ति
सुविचारों का खजाना है ज्ञान मुरली – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी
परमात्मा का मुख्य कर्तव्य विकारों के बंधनों से छुड़ाना व नई दुनिया की स्थापना करना
मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं
मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी के महावाक्य सुनाए गए

बिलासपुर, टिकरापारा 24 जून – जिस प्रकार पुराना मकान नहीं बनाया जा सकता। मकान तो नया ही बनता है परन्तु समय के साथ वह खुद ही पुराना हो जाता है। उसी प्रकार परमात्मा ने इस दुनिया को सुख-षान्ति-खुषी से भरपूर एकदम नया अर्थात् सतोप्रधान बनाया जहां मनुष्य देवताओं के समान थे और प्रकृति के पांच तत्व भी सतोप्रधान, सुखदायी थे जिसे हम स्वर्ग या सतयुग कहते हैं लेकिन समय के साथ-साथ मनुष्य में विकार प्रवेष करते गए और आत्मा सतोप्रधान से सतोसामान्य, रजो से गुजरते हुए तमोप्रधान बन गई। और मनुष्य के वृत्तियों का प्रभाव प्रकृति के पांच तत्वों पर भी पड़ा जिससे वह भी तमोप्रधान दुखदायी बन गई और कभी बाढ़, कभी सूखा, भूकम्प, सुनामी आदि के रूप में दुख देने लगी। लेकिन इस सृष्टि रूपी नाटक में परमात्मा का भी कर्तव्य शामिल है। वे अपने समय पर आते हैं अर्थात् जब पूरी सृष्टि में अधर्म फैल जाता है तब परमात्मा इस धरती पर अवतरित होकर दो मुख्य कर्तव्य करते हैं जो कोई भी मनुष्य आत्मा नहीं कर सकती। वह है- एक तो सर्व मनुष्य आत्माओं को विकारों से छुड़ाना और दूसरा है धरती पर स्वर्ग की स्थापना करना इसलिए परमात्मा को अंग्रेजी में हैवेनली गॉड फादर भी कहते हैं। परमात्मा और मनुष्यात्मा में मुख्य अंतर यही है कि मनुष्य अल्पज्ञ हैं और परमात्मा सर्वज्ञ हैं।
उक्त बातें ब्रह्माकुमारीज़ टिकरापारा में संस्था की प्रथम प्रषासिका मातेष्वरी जगदम्बा सरस्वती जी की पुण्यतिथि पर मम्मा के महावाक्य सुनाते हुए सेवाकेन्द्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी जी ने कही। आपने बताया कि मम्मा परमात्मा षिवबाबा द्वारा सुनाए गए महावाक्यों को बहुत अच्छे से स्पष्ट करती थीं।
जो आप जानते हैं, दूसरों को सीखा दें….
दीदी ने बताया कि मम्मा कहती थीं कि जो आप जानते हैं वह दूसरों को जरूर सीखा दें, इससे आपकी छवि भी अमर हो जाएगी और दूसरों में भी वह विषेषता आ जाएगी। ज्ञान मुरली अच्छे विचारों का खजाना है जिसमें प्रतिदिन परमात्म श्रीमत के साथ-साथ बहुत से अच्छे विचार शामिल होते हैं और ये सुविचार मन के लिए शक्तिषाली भोजन है जो सामान्य व्यक्ति के लिए जरूरी तो है ही परन्तु तनाव, डिप्रेषन या मनोरोगियों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्हें कहा तो जाता है कि अच्छा सोचो लेकिन अच्छा सोचने के लिए अच्छे विचार कहां से मिलेंगे, यह कोई नहीं बताता। क्योंकि मन का कार्य ही है विचार करना, यदि हम अच्छे विचार नहीं करेंगे तो निष्चित ही नकारात्मक, व्यर्थ व स्वयं को हतोत्साहित करने वाले विचार आने लगते हैं।

प्रति,
भ्राता सम्पादक महोदय,
दैनिक………………………..
बिलासपुर (छ.ग.)

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Source: BK Global News Feed

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