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मातृ दिवस पर माताओ एवं बच्चो का सम्मान किया गया

धमतरी। प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वाधान में मातृ दिवस के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया साथ ही सात दिवसीय संस्कार समय कैम्प का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन दिव्यधाम सेवाकेन्द्र पर किया गया। जिसमें मुख्य अतिथिगण श्रीमती आशा त्रिपाठी, वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ जिला चिकित्सालय धमतरी, श्रीमती रचना मिश्रा, प्राचार्या शासकीय उ.मा. विद्यालय सोरिदभाट, श्रीमती सूर्या लुकंड, अध्यक्ष भारतीय जैन संगठन महिला शाखा धमतरी, श्रीमती रंजना ठाकुर, समाजसेविका धमतरी एवं ब्रह्माकुमारी सरीता दीदी संचालिका ब्रह्माकुमारीज जिला धमतरी एवं बडी संख्या में माताए तथा समर कैम्प में भाग लेने वाले बच्चे सम्मिलित हूए।
कार्यक्रम के शुरूआत में सुमन साहू ने गीत प्रस्तुत कर एवं स्तुति महावर ने नृत्य पस्तुत कर सबका स्वागत किया खुशी सिन्हा, अंाचल मुलवानी, हेमलता परघनियां ने अपने समय कैम्प के अनुभव सबके साथ बांटा।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सरीता दीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि परमात्मा शब्द में मां समाया हुआ है और मां में परमात्मा समाया हुआ है। मां में परमात्मा के सारे गुण निहित होते है। जिस प्रकार ईश्वर के गुण, शक्तियां अनगिनत व अनंत उसी प्रकार हम मां के गुण शक्तियों का वर्णन नही कर सकते। प्रार्थनाओ में भी ईश्वर को माता पिता कहकर पुकारा जाता है। प्रकृति के पांच तत्वो में भी धरती और नदियां जो जीवन दायिनी तत्व है उसे मां कहकर संबोधित किया जाता है, क्यों कि उनमें पालना के संस्कार है। सृष्टि का आधार परमात्मा है तो परिवार का आधार मां होती है, बच्चो को संस्कारवान, चरित्रवान, ज्ञानवान, और जिम्मेदार बनाने की पहली शिक्षा उसे मां से ही प्राप्त होती है। मां के समपर्णता की किसी से कोई तुलना नही हो सकती। नारी शब्द का अर्थ ही है जिसका कोई आरी अर्थता दुश्मन न हो मां सबके लिए समान होती है। वर्तमान समय कलियुग की तमोप्रधानता नारी चरित्र में भी देखने में आती है परीवारो में सास बहु, देवरानी जेठानी आदि संबधो के नकारात्मक किस्से सुनने में आते है और देखने में आता है नारी ही नारी की दुश्मन बनती जा रही है। आज आवश्यकता है विशाल हृदय और खुली सोच का। आधयात्मिकता से जीवन में समान दृष्टिकोण, विशाल हृदय, श्रेष्ठ सोच यह सभी आते है। राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से परमात्मा हमारे जीवन कें शांति, खुशी, प्रेम, शक्ति भर रहा है।
श्रीमती सूर्या लुकंड, अध्यक्ष भारतीय जैन संगठन महिला शाखा धमतरी ने कहा कि माता का ऋण कभी भी चुकाया नही जा सकता। उसके त्याग समपर्ण की तुलना किसी से नही कर सकते।
श्रीमती आशा त्रिपाठी, वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ जिला चिकित्सालय धमतरी ने कहा कि मां की ममता का कोई मोल नही हमारी दुनिया भले की दुनियावालो से चलती होगी लेकिन मां के संसार परिवार से शुरू ओर परीवार पर ही खत्म हो जाती है। भारतीय संस्कृति ने एक मां की तरह यहां आने वाले सभी संस्कृतियों का सभ्यता का समान रूप से आदर सम्मान किया है। लेकिन हमंे भी यह देखना है कि हम पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर अपने गौरवशाली भारतीय संस्कृति को भूले नही उसका सही सम्मान करें।
श्रीमती रंजना ठाकुर, समाजसेविका धमतरी ने कहा कि मनुष्य जन्म लेते ही पहला स्पर्श मां का प्राप्त होता है। अपना सबकुछ न्यौछावर करने के बाद भी मां ने कभी प्यार, सम्मान आदर की चाहना कामना नही रखी। परीवार के संतुष्टता और खुशी में अपनी खुशी समझा। उम्र के आखिरी पडाव में यदि हम अपनी मां को आदर, सम्मान नही दे सके तो हमारा जीवन व्यर्थ है।
श्रीमती रचना मिश्रा, प्राचार्या शासकीय उ.मा. विद्यालय सोरिदभाट ने कहा कि विद्यालय में विद्या अध्ययन के साथ साथ अन्य गतिविधियां इत्यादि कराई जाती है लेकिन पढाई का बोझ और परीक्षा के भय से बच्चे इतना घ्यान नही दे पातें। लेकिन इस प्रकार के समर कैम्प में बच्चो की छिपी प्रतिभा और कौशल विकास निखरता है क्यों कि इसमें परीक्षा और फेल होने का दबाव नही रहता। किसी भी देश की सम्पत्ती उसके धन संपदा नही आपितु वहां के श्रेष्ठ चरित्रवान नागरिक होते है। मैने अपनी मां एवं दादी से एक बात सीखी की अनेक मतभेद होते हुए भी बिना किसी प्रतिक्रिया के निरंतर परीश्रम करना यह शिक्षा आजतक मेरे काम आ रही है। जीवन में अनेक उतार चढाव आए लेकिन बडे बुजुर्गो का साथ और सहयोग ने मुझे सदा ही संबल प्रदान किया है।
कार्यक्रम के अंत में संस्कार समर कैम्प में भाग लेने वाले सभी बच्चो को पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती कामिनी कौशिक जी ने किया।

Source: BK Global News Feed

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