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अलीराजपुर : मस्तिष्क को कमजोर करता इलेक्ट्रॉनिक साधन -Summer Camp for Children

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मस्तिष्क को कमजोर करता इलेक्ट्रॉनिक साधन     साधनों का दुरुपयोग जीवन को श्रापित           ब्रह्माकुमार नारायण भाई अलीराजपुर 14 मई, वर्तमान समय विज्ञानिक युग में अनेक इलेक्ट्रॉनिक साधन मानव को वरदान के रुप में दिए हैं परंतु जो मानव वरदानो का दुरुपयोग करता वह वरदान भी श्राप बन जाता। इनमें अच्छी सूचनाएं भी होती है और मन को भटकाने वाले कुविचार ।इन से निकलने वाली बुरी तरंगे मस्तिष्क व शरीर पर बुरा प्रभाव डाल रही है, जो बच्चे इन पर लंबा समय व्यतीत करते उनके मन की स्पीड फास्ट हो जाती उनके मस्तिष्क की शक्ति क्षीण होती रहती है। एकाग्रता उनके लिए किसी अन्य जन्म की बात रह जाती। पढ़ाई लिखाई में अच्छे नहीं बन पाते हैं। जिन मां बाप ने बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा दिया समझ लें उन्होंने उनकी मौत का आह्वान कर लिया। उसकी बुद्धि का विकास रुक गया। बच्चों का मस्तिष्क नाजुक होने के कारण जल्दी सिकुड़ने लगता है। इसीलिए बच्चे अनेक मानसिक रोग के शिकार चिड़चिड़ापन ,भूल जाना, बार-बार एक बात को रिपीट करना, याददाश्त की कमी, इत्यादि रोग तेजी से फैलते जा रहे हैं। यह विचार दीपा की चौकी में ब्रह्मा कुमारी द्वारा आयोजित बच्चों के सर्वांगीण विकास कार्यक्रम बाल व्यक्तित्व शिविर में इंदौर से पधारे ब्रह्माकुमार नारायण भाई ने कहीं photo No. 185711 ।सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी माधुरी ने कहा रात को बच्चे टीवी देख सोते हैं जिससे उनकी निद्रा भी डिस्टर्ब हो रही है। बच्चे गहरी नींद नहीं ले पाने के कारण वह सब कुछ भूलता जा रहा है। रात को सोते समय परमात्मा से गुड नाइट करें सवेरे उठते समय गुड मॉर्निंग करें तो बच्चे ऊर्जावान, प्रतिभावान बन सकते हैं।   photo No   190555 छकतला से पधारे प्रिंसिपल सत्येंद्र जी ने कहा कि बच्चों को अपने से बड़ों का आदर सम्मान करना चाहिए और विद्यार्थियों में आपसी प्यार रहना चाहिए। जिससे आत्म शांति, संतुष्टि मिलती है ।बुद्धि का विकास होता है ।आज विद्यार्थी गुणों को छोड़ अवगुणों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहा है जिसका कारण टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया ।राजयोग का अभ्यास प्रत्येक विद्यार्थी को करना चाहिए जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।   photo No  193120  समाजसेवी मदन पोरवाल ने कहा कि क्रोध मानव का सबसे बड़ा दुश्मन है इससे बुद्धि का विनाश हो जाता है ।जबकि अच्छी सफलता में शांति का बड़ा हाथ होता है। बच्चे अगर क्रोध का त्याग कर दे, वह मन को शांत राजयोग के माध्यम से कर ले तो वह बच्चा अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। आज बच्चों को शिक्षा तो दी जा रही है लेकिन सुसस्कारित नहीं किया जा रहा है। इसलिए ऐसे शिविर की आवश्यकता वर्तमान में बढ़ती जा रही है।  photo No   190830   भ्राता अरुण गहलोत ने कहा कि बच्चे दिल के सच्चे होते हैं वह सब कुछ मां-बाप से सीखते हैं। अतः बच्चों को चरित्रवान, ऊर्जावान बनाने में मां-बाप अपने बोल करम पर ध्यान रखें। बच्चों को गीत, संगीत, चेयर रेस, वाद विवाद प्रतियोगिता, ग्रुप डांस भी कराया गया। अंत में एकाग्रता के लिए राजयोग की ट्रेनिंग व प्रैक्टिस भी कराई गई।।

Source: BK Global News Feed

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