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अच्छी किताबों को अपना दोस्त बनाओ – ब्र.कु. सरिता दीदी

संस्कार समर कैम्प का शुभारंभ

धमतरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय धमतरी के त्वाधान में 5 मई से 11 मई तक चलने वाले संस्कार समर कैम्प का शुभारंभ आज प्रातः 9 बजे ब्रह्माकुमारीज़ दिव्यधाम धमतरी में दीप पज्ज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री हरिकीर्तन राठौर, जिला महिला बाल विकास अधिकरी धमतरी, श्रीमती सुमन नेताम, अधिक्षिका प्री मैट्रिक कन्या छात्रावास धमतरी, श्रीमती कामिनी कौशिक शिक्षिका माॅडल स्कूल धमतरी, श्रीमती प्रतीक्षा बाबर, प्राचार्या केन एकेडमी धमतरी, ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी संचालिका ब्रह्माकुमारीज़ धमतरी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के साथ -साथ संस्कार देना आवश्यक है। बच्चे तो एक कच्चे मिट्टी के समान है और हम उनको जो आकार देना चाहें दे सकते हैं। छोटी उम्र में बच्चों के अंदर अच्छे संस्कार भरे जा सकते हैं लेकिन बड़ों का संस्कार परिवर्तन करना कठिन होता है। हम किसी का भाग्य नहीं बना सकते लेकिन उनको श्रेष्ठ भाग्य बनाने का रास्त अवश्य दिखा सकते हैं। पालको का एक ही शिकायत होता है कि बच्चे मन लगाकर पढ़ाई नहीं करते, बच्चों का मन एकाग्र नहंी होता। बच्चों को मेडिटेशन सिखाया जाए तो उनका मन बहुत जल्दी एकाग्र हो जाता है और वे एकाग्रचित्त होकर पढ़ाई कर सकते हैं। माता पिता को बच्चों की रूचि को समझने का प्रयास करना चाहिए कि बच्चा क्या चाहता है उसी अनुसार उनकी शिक्षा का प्रबंध करें। खुशी को पकड़ के रखो, क्रोध को छोड़ दो, भय लगता है तो सामना करो, स्मृतियों को बहुत उंचा रखो, लक्ष्य अगर उंचा हो तो प्रकृति के साथ-साथ भगवान भी हमारी मदद करते हैं, नम्रतो को सदा अपने साथ रखो, कभी कोई गलती हो जाए तो माफी मांगने में कतराओ नहीं। अच्छी किताबों को अपना दोस्त बनाओ और मोबाईल से दूर रहो। अपने कार्य खुद करो, अपने कमरे के सामानों को व्यवस्थि रखो और बड़ों का सम्मान करो।
इसी तरह सुमन नेताम ने कहा कि ब्रह्माकुमारी के संस्कार समर कैम्प के माध्यम से बच्चों को मेडिटेशन सीखने का बहुत अच्छा अवसर मिला है। और यह मेडिटेशन आपको जीवन की हर परिस्थितियों से निकलने में मदद करेगा।
इसी क्रम में हरिकीर्तन राठौर ने कहा कि वैज्ञानिक रिसर्च में ये पता चला कि 15-20 मिनट तक मन-बुद्धि पढाई में पूरी तरह एकाग्र होता है उसके बाद मन-बुद्धि थकने लगता है और जो पढ़ाई करते है वह कम याद रहती है। इसके लिए हर 40 मिनट पश्चात विराम लेे और 10 मिनट मेडिटेशन करें इससे मन-बुद्धि फिर से एकाग्र हो जाएगी। बच्चे अपने बड़ों एवं आसपास के माहौल से संस्कार सीखता है। बच्चों को अपने माता – पिता को प्रणाम करना चाहिए। कुछ भी हम खाते हैं उससे उत्पन्न कचरे को इधर उधर न फेंक कचरे के डिब्बे में ही डालना चाहिए।
इसी तरह कामिनी कौशिक ने कहा कि भारत ऋषि-मुनि, देवी-देवताओं की भूमि है आप उस भारत के बच्चें है। 7 दिनों के संस्कार समर कैम्प में राजयोग के माध्यम से मन-बुद्धि को एकाग्र करने की विधि सीखेंगे।
श्रीमती प्रतीक्षा बाबर ने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों के द्वारा जो शिक्षाएं मिलती हैं उन्हें अपने जीवन में धारण करें तो आपके श्रेष्ठ संस्कार बन जाएंगे। ब्र.कु. सरस बहन ने सात दिनों के विषय के बारे में बताया – 1 विद्यार्थी नम्बर वन कैसे बने, 2 सफलता के सूत्र, 3 एकाग्रता, 4 निर्भय कैसे बने, 5 लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें। मंच का संचालन श्रीमती सुष्मा नंदा ने किया।

Source: BK Global News Feed

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