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कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय के सीनेट हाल में श्रीमद भगवद गीता पर सेमिनार का आयोजन

कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय के सीनेट हाल में श्रीमद भगवद गीता पर सेमिनार का आयोजन किया गया | इस कार्यक्रम का आयोजन दर्शन शास्त्र के श्रीमद भगवद गीता अध्धयन केंद्र द्वारा किया गया | जिसमे मुख्य वक्ता माउंट आबू से आये राजयोगी बी.के. बृजमोहन भाई ,राजयोगिनी बी. के. उषा दीदी ,प्रो .देसवाल (निदेशक श्रीमद भगवत गीता अधध्यन केंद्र ),मुख्य अतिथि श्रीमती मंजुला चौधरी(मुख्य अतिथि ) , ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी |

 

जिसमे मुख्य वक्ता माउंट आबू से आये राजयोगी बी.के. बृजमोहन भाई, राजयोगिनी बी. के. उषा दीदी, प्रो .देसवाल (निदेशक श्रीमद भगवत गीता अधध्यन केंद्र ),मुख्य अतिथि श्रीमती मंजुला चौधरी(मुख्य अतिथि ) , ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी |

दीप प्रज्वलित से कार्यक्रम की शुरुवात की गयी जिसमे मुख्य वक्ता माउंट आबू से आये राजयोगी बी.के. बृजमोहन भाई ,राजयोगिनी बी. के. उषा दीदी ,प्रो .देसवाल (निदेशक श्रीमद भगवत गीता अधयन केंद्र ),मुख्य अतिथि श्रीमती मंजुला चौधरी , ब्रह्माकुमारी सरोज दीदी |

मुख्य वक्ता माउंट आबू से आये राजयोगी बी.के. बृजमोहन भाई (एडिशनल सेक्रेटरी जनरल) ने अपने सम्बोधन में बताया की भारत का सम्मान विश्व में गीता के कारण है गेता के सामने पुरे विश्व के लोगो का सिर झुक जाता है | गीता के प्रथम अध्याय में लिखा है हम आत्मा है |जब भारत के लोग अपने को आत्मा मानते थे |तब भारत स्वर्ग था गीता की सबसे मुख्य बात है योग का आदि ग्रथ है – भगवत गीता |हमारे पास गीता का ज्ञान होते हुए भी भारत पतित क्यों बना है |

भगवन ने संकेत दिया है काम ,क्रोध अपने पांच शत्रुओं को पहचानो वो है |पांच विकार से ही सारे विश्व में अपराध बढ़ते जा रहे है | परिवर्तन भारत से होगा उत्थान भारत से ही होगा |गीता कर्म योग का शास्त्र है गीता से ही समाज में बदलाव है |

बी.के. उषा दीदी जी -विशिष्ट अतिथि माउंट आबू से आये राजयोगिनी बी. के. उषा ने बताया की गीता कितनी गहरी है इसे कोई माप न सका है जब भी चितन करते है तो नया कुछ न कुछ प्राप्त होता है |दूसरे अधयाय में जब भगवन ने बताया हमारा स्वधर्म क्या है |आत्मा का स्वधर्म है शांति |हर कोई शांति चाहता है बच्चा भी शांति चाहता है आज मनुष्य में शांति ही नहीं है मनमनाभव का अर्थ है | कर्म करते हुए भी मन मेरे में लगा | तीसरे अध्याय में अर्जुन पूछता है मन को कैसे जीता जा सकता है

मुख्य अतिथि श्रीमती मंजुला चौधरी (निदेशक पत्राचार पाठ्यकर्म )कार्यक्रम में बताया की गीता हमे बताती है की हमे क्या खाना चाहिए |क्योकि खाने का परवाह तन व् मन पर पड़ता है |स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वस् होता है |कुरुक्षेत्र वि. कुरुक्षेत्र ने पत्राचार कार्यक्रम द्वारा अनेक कोर्स प्रारभ्भ किये है |जिससे गीता के प्रति रूचि रखने वाले लाभ उठा सकते है |दर्शन शास्त्र विभाग द्वारा श्रीमद भगवद गीता अध्धयन केंद्र की शुरुवात २०१९ में की गई |जिससे विश्व विद्यालय ,कुरुक्षेत्र की अलग से पहचान बन सके |

प्रो . देसवाल(निदेशक श्रीमद भगवद गीता अधययन ) ने बताया की गीता को हम पवित्र ग्रथ कहते है |उन्होंर गीता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की व् अनेक प्रकार की रचित गीता के बारे विस्तार से बताया |उन्होंने गीता में वर्णित 700 श्लोको का वर्णन करते हुए पूर्ण जानकारी दी| उन्होंने गीता को ५ भागो में बाँट कर विस्तार से चर्चा की |

स्थानीय सेवा केंद्र इंचार्ज राजयोगिनी बी.के सरोज बहन ने सभी आये हुए मेहमानो का व् विश्व विधालय के विभिन्न विभागों आये हुए गीता जिज्ञासु का धन्यवाद किया |गीता में वर्णित राजयोग सीखने के लिए सभी को ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आमंत्रित किया की आकर आप भी राजयोग की शिक्षा प्राप्त क्र सकते है जैसे आपका विश्व वि. है ऐसे यह भी ईश्वरीय विश्व विद्यालय है जहां पर राजयोग की शिक्षा दी जाती है

राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उषा बहन जी ने सभी को राजयोग के द्वारा शांति की अनुभूति कराई|

Source: BK Global News Feed

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