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​Mount Abu – ​पाण्डव भवन, ​​ज्ञान सरोवर, आध्यात्मिक संग्रहालय, ​ग्लोबल अस्पताल में ​​शिवरात्रि कार्यक्रम

सत्यम शिवम सुंदरम का अनुसरण करने से संभव हैं जन कल्याण
पाण्डव भवन में शिवरात्रि कार्यक्रम
माउंट आबू, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सह मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने कहा कि ज्ञान के अभाव में मनुष्य ईश्वरीय वरदानों से वंचित रहता है। अज्ञान अंधकार के कारण आत्मा विकर्म करने के बाद दु:ख, अशान्ति की अनुभूति करती है। ऐसी तनावजन्य जिंदगी को सुखमय बनाने के लिए नियमित रूप से सत्यम् शिवम् सुन्दम् शिव परमात्मा के सत्य ज्ञान का अनुसरण करना चाहिए। देह के तल से ऊपर उठकर आत्मचिंतन करने से परमात्मा का अनुभव किया जा सकता है। वे मंगलवार को शिवरात्रि महोत्सव पखवाडा के अंतर्गत ब्रह्माकुमारी संगठन के मुख्यालय पाण्डव भवन परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहीं थीं।

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संगठन के ज्ञान सरोवर अकादमी निदेशिका राजयोगिनी डॉ. निर्मला ने कहा कि परमपिता शिव परमात्मा के साथ संबंध जोडऩे से ही आत्मा मुक्ति व जीवनमुक्ति का अनुभव कर सकती है। जीवन में असफलता का एकमात्र कारण अज्ञान अंधकार है। उन्होंने कहा कि सत्य ज्ञान व ईश्वर का ध्यान ही आत्मा का सशक्तिकरण करता है। अज्ञानता की मैल आने से आत्मा पतित बनती है, आत्मा स्वयं के मूल्यों से गिरकर श्रेष्ठ कर्मों में प्रवृत होने की शक्ति खो देती है।
खेल प्रभाग की राट्रीय उपाध्यक्ष राजयोगिनी शशि प्रभा दीदी ने कहा कि जितना ज्यादा मन, बुद्धि को आध्यात्मिक ज्ञान से परिपूर्ण रखेंगे उतना ही जीवन में आने वाली समस्याओं को खेल की तरह पार कर सकते हैं। आत्मा में अथाह शक्तियों का खजाना है, आत्मजागृति के लिए राजयोग का अभ्यास करना चाहिए।
लंदन से आई राजयोगिनी जयंति बहन ने कहा कि हर मनुष्य के अंदर आध्यात्मिकता का प्रकाश होता है। ईश्वर से संबंध जोडऩे के बाद ही उस प्रकाश को प्रज्जवलित किया जा सकता है। जर्मनी से आई सुदेश बहन ने कहा कि यदि मनुष्य अपने मूल संस्कारों से परिचित हो जाए तो जीवन में स्थाई सुख, शान्ति व खुशी की अनुभूति स्वत: ही होती है। न्यूजिलैंड से आई बी. के. भावना बहन ने कहा कि शिवरात्रि का वास्तविक अर्थ समझने की जरूरत है। परमात्मा से मांगने की बजाए उनसे अधिकार प्राप्त करने की मानसिकता रखनी चाहिए।
शिक्षा प्रभाग उपाध्यक्ष बीके मृत्युंजय ने कहा कि अज्ञान तिमिर को समाप्त करने से ही समस्याओं का समाधान होगा। इस मौके पर शांतिवन मुख्य अभियंता बी. के. भरत, ज्ञानामृत मासिक पत्रिका मुख्य संपादक बी.के. आत्मप्रकाश, ग्लोबल अस्पताल निदेशक डां. प्रताप मिढ्ढा, वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बी.के. शीलू, बी. के. मोहन सिंहल, जापान से आई बीके रजनी, अमेरीका से आई डां. कला बहन आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
भाग्योदय करने का पर्व है शिवरात्रि
ज्ञान सरोवर में शिवरात्रि कार्यक्रम
माउंट आबू, ब्रह्माकुमारी संगठन की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि अशांति की जंजीरों में जकड़े संसार को पापाचार से मुक्त करना एक परमात्मा का ही कत्र्तव्य है। शिवरात्रि के रोचक व रहस्यमय पौराणिक प्रसंगों का महातम्य जानने से ही शिव परमात्मा से मन के तार जोड़े जा सकते हैं। शिवरात्रि पर्व स्वयं का भाग्योदय करने का पर्व है। यह बात उन्होंने शुक्रवार को ब्रह्माकुमारी संगठन के ज्ञान सरोवर अकादमी परिसर में शिवरात्रि कार्यक्रम में कही।
ज्ञान सरोवर निदेशिका राजयोगिनी बीके. डॉ. निर्मला ने कहा कि अपकारी पर भी उपकार करने की सोच बनाए रखते हुुए समाज के हर प्राणी सुखी हों, सबका कल्याण हो, इन्हीं सकारात्मक विचारों को मन में स्थान दिया जाना ही महानता का प्रथम सोपान है।
लंदन से आई यूरोप सेवाकेंद्र प्रभारी बीके जयंती बहन ने कहा कि मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए भारतीय संस्कृति को अपनाने को लेकर पश्चिमी जगत में जागरूकता बढ़ी है।
खेल प्रभाग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीके. शशि बहन ने कहा कि जीवन में कुछ प्राप्त करने के लिए त्याग की भी जरूरत होती है इसलिए चाहिए चाहिए की भावनाओं को अभी समाप्त कर देना चाहिए।
मल्टीमीडिया प्रभाग अध्यक्ष बीके करूणा भाई ने कहा कि पाप जब लोगों के सिर पर चढ़कर बोलने लगता है तभी परमात्मा शिव का अवतरण होता है। शिवरात्रि पर्व का यह वही समय है जब परमारत्मा इस धरा पर अवतरित होकर सर्व आत्माओं को पापों से मुक्त करने के लिए पावन बनाने का कार्य कर रहे हैं।  कार्यक्रम में शिक्षा प्रभाग उपाध्यक्ष बी. के. शीलू बहन ग्लोबल अस्प्ताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा, जापान से रजनी बहन आदि ने शिवरात्रि पर्व की महता पर प्रकाश डाला।
मन की शांति को ईश्वर निष्ठा जरूरी – राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी 
आध्यात्मिक संग्रहालय में आयोजित शिवरात्रि कार्यक्रम
माउंट आबू, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की सह मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतन मोहिनी ने कहा कि ईश्वर के प्रति निष्ठा रखने से ही मन शांत होने लगता है। राजयोग के माध्यम से जब आत्मा में ईश्वरीय शक्तियों का बल भरने लगता है तो पहाड़ जैसी परिस्थितियों को पार करना भी खेल का अनुभव होता है। यह बात उन्होंने बुधवार को सूर्यास्त दशर्न मार्ग स्थित संगठन के आध्यात्मिक संग्रहालय में आयोजित शिवरात्रि पखवाडा महोत्सव कार्यक्रम को संबोधित करते कही।
संगठन की खेल प्रभाग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  राजयोगिनी शशि प्रभा दीदी ने कहा कि अहंकारवश मनुष्य अपने आत्मिक मूल्यों की अविनाशी पंूजी से वंचित हो रहा है। अहंकार त्यागने से ही जीवन में सुखशांति संभव है।
संग्रहालय प्रभारी बी. के. प्रतिभा बहन ने कहा कि बार-बार देह का चिन्तन करने से आत्मा के ऊपर विकारों की परत चढ़ी है। मुक्ति पाने को अपनी वृति को संपूर्ण रूप से निर्विकारी बनाने की जरूरत है।
ज्ञानसरोवर आकादमी निदेशिका राजयोगिनी डां. निर्मला ने कहा कि आत्मा को पावन व शक्तिशाली बनाने के लिए मनुष्य को शिव परमात्मा के सत्य ज्ञान का ही अनुसरण करना चाहिए।
शिक्षा प्रभाग अध्यक्ष बीके मृत्युजंय ने कहा कि अज्ञानता विनाश के प्रतीक शिवरात्रि महापर्व की महता को जानकर उसका अनुसरण करने से शिव परमात्मा के वरदानों की अनुभूति होती है।
इस अवसर पर यूरोप सेवाकेंद्र प्रभारी बीके जयंती बहन, ज्ञानामृत मासिक पत्रिका मुख्य संपादक बीके आत्म प्रकाश, वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षिका बी. के. शीलू बहन, ग्लोबल अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा, अमेरिका से आई डॉ. कला बहन, न्यूजीलेंड से आई बीके भावना, जापान से आई बी.के. रजनी आदि ने भी विचार व्यक्त किये।
व्यर्थ न गंवाएं संकल्प शक्ति को
ग्लोबल अस्पताल में शिवरात्रि महोत्सव
माउंट आबू। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी ने कहा कि संकल्प शक्ति को व्यर्थ में नहीं गंवाना चाहिए। समर्थ संकल्प जीवन को सुख, शान्ति प्रदान करते हैं। व्यर्थ संकल्प आग के समान हैं जो मन की शक्ति को खत्म करते हैं। विवेकवान मनुष्य अध्यात्म से परिपूर्ण होता है जो हर प्रकार की विकटतम परिस्थिति में स्वयं को तथा समाज को सही दिशा दिखाने में प्रयासरत रहता है। वे शनिवार को ग्लोबल अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र माउंट आबू में शिवरात्रि महोत्सव के तहत आयोजित समारोह को संबोधित कर रहीं थीं।
ज्ञान सरोवर निदेशिका राजयोगिनी डॉ. निर्मला ने कहा कि दु:ख हर्ता सुख कर्ता परमपिता शिव परमात्मा से संबंध जोडऩे के लिए आत्मा के सत्य स्वरूप को जानना जरूरी है, इसके बाद मानव स्वत: ही दु:खों से निजात पा सकता है।
ग्लोबल अस्पताल निदेशक डॉ. प्रताप मिढ्ढा ने कहा कि व्याधियों से अप्रभावित रहने के लिए अच्छी सोच, नियमित राजयोग का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। अधिकतर बीमारियां मनुष्य के संकुचित व नेगेटिव विचारों से पैदा होती हैं।
यूरोप सेवाकेंद्र प्रभारी बीके जयंती बहन ने कहा कि सच्चे दिल से की गई सेवा से मरीजों को जल्दी ही राहत मिलती है। त्यौहार मानवीय एकता को सुदृढ़ बनाते हैं। समाज को सही दिशा दिखाने के लिए अपने उद्देश्यों से विचलित नहीं होना चाहिए।
खेल प्रभाग राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीके. शशि बहन ने कहा कि अनेकों के जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले ही साधुवाध के पात्र होते हैं। दूसरों के दु:ख स्वयं का दु:ख समझकर उनकी सेवा करनी चाहिए।
मीडिया प्रभाग अध्यक्ष बीके. करूणा ने कहा कि अपने हित की अपेक्षा जब परहित को अधिक महत्व देंगे तो ही समाज श्रेष्ठ बनेगा।

Source: BK Global News Feed

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